जम्मू की रूपनगर में रहने वालीं रेनू हंस ने वो कर दिखाया है जो लाखों लोगों के लिए सिर्फ एक सपना है. मूक-बधिर होने के बावजूद उन्होंने JKBOSE की 10वीं की परीक्षा 82% अंकों के साथ पास कर ली है. इस कहानी की सबसे खूबसूरत बात है कि उनकी इस जीत के पीछे टीचर कोई और नहीं, उनका अपना बेटा है. उनके 12वीं में पढ़ रहे बेटे नमन कौल का है, जो अपनी मां के गुरु बने और उनका सपना पूरा किया. ये मां और बेटे की कहानी उन लोगों के लिए एक नजीर है, जो जिंदगी में काफी जल्दी हार मान लेते हैं.
1990 में कुलगाम से पलायन, फिर छूट गई पढ़ाई
रेनू का परिवार 90 के दशक में कुलगाम से पलायन कर जम्मू के रूपनगर में बस गया था. शादी से पहले रेनू ने 10वीं की परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो सकीं. फिर शादी, घर-परिवार की जिम्मेदारियों में उनका पढ़ने का सपना कहीं पीछे छूट गया. रेनू के पति बबलू कौल भी मूक-बधिर हैं और घर पर सिलाई का काम करते हैं.
बेटे ने बढ़ाया हौसला
12वीं साइंस स्ट्रीम में पढ़ रहे नमन को लगा कि उनकी मां को सिर्फ घर के कामों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्होंने खुद मां को पढ़ाने की ठानी. नमन ने बताया, "दिन में मैं अपनी पढ़ाई करता और शाम को मां को पढ़ाता. इशारों में ही उनके सारे डाउट्स क्लियर करता था. मैंने खुद बोर्ड ऑफिस जाकर उनका प्राइवेट फॉर्म भरवाया."
अप्रैल में जब परीक्षा देने सेंटर पहुंचीं तो अपने से काफी छोटी उम्र के बच्चों को देखकर रेनू थोड़ा घबरा गईं, लेकिन बेटे की हिम्मत से उन्होंने सभी पेपर पूरे आत्मविश्वास से दिए. सितंबर में जब JKBOSE का रिजल्ट आया तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. रेनू ने 82% अंक हासिल किए थे. इसे लेकर रेनू इशारों में कहती हैं, "मेरा सपना आज पूरा हुआ है. ये सब मेरे बेटे की वजह से संभव हुआ." रेनू की यह कहानी साबित करती है कि अगर हौसला हो और परिवार साथ दे, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं.
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