अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन में पढ़ने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों को बड़ा झटका लगा है. यूके में बड़े स्तर पर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के छात्रों का एडमिशन रद्द किया जा रहा है. यूनिवर्सिटीज और वीजा नियमों में सख्ती के चलते ऐसा किया जा रहा है. सरकार की तरफ से यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों के लिए वीजा रिफ्यूजन नियम में बदलाव किया गया है, जिसका असर अब भारत समेत दूसरे देशों से ब्रिटेन आने वाले छात्रों पर पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि ये पूरा मामला क्या है और ब्रिटेन में किन छात्रों के एडमिशन रद्द किए जा रहे हैं.
क्या है पूरा विवाद?
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इसकी सबसे बड़ी वजह यूनिवर्सिटीज में फैला डर है. उन्हें ये डर सता रहा है कि कहीं वीजा सख्ती के चलते विदेशी छात्रों के एडमिशन पर पूरी तरह से रोक न लगा दी जाए. दरअसल जून 2026 से ब्रिटेन में 'बेसिक कंप्लायंस असेसमेंट' (BCA) नियम लागू हुए हैं. इसमें यूनिवर्सिटीज को बताया गया है कि उनके यहां स्टूडेंट वीजा रिफ्यूजल की दर 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. ये पहले 10 प्रतिशत तक हुआ करती थी.
किन छात्रों के एडमिशन हो रहे रद्द?
ब्रिटिश सरकार के इस नए नियम का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है. ऐसा नहीं करने वाली यूनिवर्सिटीज के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की बात कही गई है और उनका स्टूडेंट स्पॉन्सर लाइसेंस भी छीना जा सकता है. ऐसे में कोई भी यूनिवर्सिटी रिस्क नहीं लेना चाहती है. ऐसे में जिन छात्रों के वीजा आवेदन रद्द होने के आसार दिख रहे हैं, उनके एडमिशन कैंसिल किए जा रहे हैं. इसमें ज्यादातर पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत जैसे देशों के छात्र हैं.
नहीं मिल पाएगा वीजा
जब भी कोई छात्र ब्रिटेन की किसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आवेदन करता है तो यूनिवर्सिटी से उसे एडमिशन ऑफर दिया जाता है. इसके आधार पर ही वो स्टडी वीजा के लिए आवेदन करते हैं. हालांकि अब यूनिवर्सिटी ने ही एडमिशन रद्द कर दिए हैं तो छात्र स्टडी वीजा के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएंगे, पहले से आवेदन कर चुके छात्रों की एप्लीकेशन खारिज हो सकती है.
किस देश के कितने आवेदन हुए वापस?
जो आंकड़ा दिया गया है, उसमें सबसे ज्यादा आवेदन पाकिस्तान के छात्रों के रद्द हुए हैं. जनवरी से जून 2026 तक पाकिस्तान के 40 प्रतिशत से ज्यादा आवेदन वापस लिए गए हैं. हैरानी की बात ये है कि पिछले साल ये आंकड़ा महज 3 प्रतिशत का है. इसके बाद बांग्लादेश के छात्रों का ये आंकड़ा 7 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है. भारत की बात करें तो ये 1.2 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गया है.
अमेरिका में भी नियम हुए सख्त
अमेरिकी सरकार के एक विभाग की तरफ से प्रस्ताव दिया गया है कि अमेरिका में पढ़ाई के बाद वर्क वीजा के लिए यूनिवर्सिटी को 70 हजार डॉलर देने होंगे. यूनिवर्सिटीज की तरफ से मिलने वाले ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के लिए ये भारी भरकम फीस वसूलने की तैयारी है. इसका असर उन भारतीय छात्रों पर पड़ेगा, जो अमेरिका में पढ़ाई के बाद अपना करियर शुरू करना चाहते हैं.
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