IAS Anudeep Durishetty Success Story: लाखों युवाओं का सपना होता है कि पढ़ाई के बाद गूगल (Google) जैसी दिग्गज टेक कंपनी में मोटी सैलरी वाली नौकरी मिल जाए. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके लिए ऐशो-आराम से ज्यादा देश सेवा का जज्बा मायने रखता है. ऐसी ही एक मिसाल हैं अनुदीप दुरीशेट्टी, जिन्होंने गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की शानदार नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की राह चुनी और आखिरकार यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2017 (UPSC Civil Services Examination 2017) में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करके पूरे देश में टॉप किया. आइए जानते हैं सख्त प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर अपनी पहचान बना चुके अनुदीप दुरीशेट्टी के जिला कलेक्टर बनने की कहानी.
अनुदीप दुरीशेट्टी की शुरुआती पढ़ाई और गूगल में जॉब
तेलंगाना के मेटपल्ली कस्बे के रहने वाले अनुदीप बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार थे. उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई श्री सूर्योदय हाई स्कूल से पूरी की और बाद में श्री चैतन्य जूनियर कॉलेज से इंटरमीडिएट पास किया. इसके बाद उन्होंने बिट्स पिलानी (BITS Pilani) के हैदराबाद कैंपस से कंप्यूटर साइंस (Computer Science) में बीटेक किया. कॉलेज पूरा होते ही उनका सेलेक्शन गूगल (Google Hyderabad) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में हो गया.
अनुदीप दुरीशेट्टी ने गूगल की जॉब क्यों छोड़ी
गूगल में काम और सैलरी दोनों बेहतरीन थे, लेकिन अनुदीप का दिल समाज में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए धड़क रहा था. देश सेवा के इसी जुनून के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट लाइफ छोड़ सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की.
पहले IRS फिर 5वें अटेम्ट में बने UPSC टॉपर
UPSC का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन अनुदीप ने कभी हार नहीं मानी. अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 790वीं रैंक हासिल की और उनका सेलेक्शन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हुआ. उन्होंने हैदराबाद में कस्टम्स और सेंट्रल एक्साइज विभाग में बतौर असिस्टेंट कमिश्नर जिम्मेदारी संभाली. IRS जैसी बड़ी नौकरी मिलने के बाद भी उनका फोकस IAS बनने पर ही रहा. नौकरी के साथ-साथ उन्होंने लगातार पढ़ाई जारी रखी. साल 2017 की UPSC परीक्षा (2018 बैच) में अपने 5वें प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करके पूरे देश में टॉप किया.
IAS बनने के बाद होम कैडर चुना
IAS बनने के बाद अनुदीप ने तेलंगाना कैडर (Telangana Cadre) चुना, जो उनका होम स्टेट भी है. उन्होंने अपने काम के जरिए राज्य में खासतौर पर हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर में बदलाव लाने की इच्छा जताई. वह सिर्फ जॉब तक नहीं रहना चाहते थे, बल्कि प्रशासन के जरिए लोगों की जिंदगी में बेहतर बदलाव लाना चाहते थे.
सख्त अफसर की पहचान, लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस
अनुदीप दुरीशेट्टी अभी तेलंगाना के खम्मम जिले के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट हैं. इससे पहले हैदराबाद के जिला कलेक्टर रह चुके हैं. उनका मानना है कि सरकारी दफ्तर जनता की समस्याओं को हल करने के लिए होते हैं. एक बार सिकंदराबाद इंस्पेक्शन के दौरान जब उन्होंने कुर्सियां खाली देखीं, तो उन्होंने साफ किया कि ड्यूटी से गायब रहना सर्विस रूल्स का सीधा उल्लंघन है. इसके बाद सभी पर कड़ा एक्शन लिया.
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