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बापू ने कई साल पहले दिया था वोकेशनल लर्निंग का आइडिया, शिक्षा व्यवस्था पर गांधी के पांच विचार

Mahatma Gandhi Views On Education: न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत जिन रिफॉर्म्स की बात हो रही है, उनका विचार महात्मा गांधी ने आज से कई साल पहले ही रख दिया था. गांधी का मानना था कि छात्रों का विकास हर तरह से किया जाना चाहिए.

बापू ने कई साल पहले दिया था वोकेशनल लर्निंग का आइडिया, शिक्षा व्यवस्था पर गांधी के पांच विचार
महात्मा गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर दिए थे ये विचार

महात्मा गांधी को भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में लोग अपना आदर्श मानते हैं. गांधी सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि वो एक दूरदर्शी शिक्षाविद भी थे, जिन्होंने आज से कई दशक पहले उन चीजों के बारे में बता दिया था, जो आज भी पूरी तरह से लागू नहीं हो पा रही हैं. गांधी ने वोकेशनल एजुकेशन को लेकर कई साल पहले ही अपने विचार रखे थे, उन्होंने कहा था कि अंग्रेजी हुकूमत ने जो शिक्षा व्यवस्था थोपी है, वो सिर्फ क्लर्क तैयार कर सकती है. इंसानों को आत्मनिर्भर और नैतिक बनाने के लिए वास्तविक शिक्षा जरूरी है. आज गांधी जयंती के मौके पर हम आपको शिक्षा व्यवस्था पर गांधी के पांच विचार बता रहे हैं. 

लिखना-पढ़ना ही शिक्षा नहीं

महात्मा गांधी का मानना था कि सिर्फ पढ़ना-लिखना या फिर गणित के फॉर्मूलों को सीखना ही शिक्षा नहीं है. उन्होंने बताया था कि शिक्षा ऐसी होन चाहिए, जो इंसान के दिल, दिमाग और हाथों का संतुलित विकास करे. दिमाग ज्ञान के लिए, हाथ हुनर के लिए और दिल नैतिक मूल्यों के लिए जरूरी है. 

वोकेशनल एजुकेशन पर दिया जोर 

आज न्यू एजुकेश पॉलिसी में वोकेशनल एजुकेशन पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन गांधी ने ये चीज कई साल पहले ही कह दी थी. उनकी सोच थी कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे कोई भी छात्र रोजी-रोटी के लिए किसी दूसरे पर निर्भर न रहे. यही वजह है कि उन्होंने छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने की तरफ जोर दिया.

उनका मानना था कि छात्रों को ऐसी चीजें भी सिखानी चाहिए, जो 14 साल की उम्र के बाद उन्हें पूरी तरह से आत्मनिर्भर बना दे. यानी आज से कई दशक पहले ही गांधी ने स्किल एजुकेशन पर जोर देने की बात कही थी.

मातृभाषा पर जोर 

बापू का मानना था कि विदेशी भाषा से शिक्षा देना मानसिक विकास को अपंग कर देता है. उन्होंने कहा था कि छात्रों को मातृभाषा के अलावा किसी दूसरी भाषा में शुरुआती शिक्षा देना, उनका मानसिक बोझ बढ़ाने जैसा है. बच्चे अपनी मातृभाषा में हर चीज को सहजता से सीखते हैं और समझते हैं. 

स्कूल के भारी बैग से आजादी 

भारत के तमाम स्कूलों में आज नो-बैग डे मनाया जाता है, जिसमें छात्र बिना भारी बैग के स्कूल आते हैं. गांधी ने कई साल पहले इसके खिलाफ आवाज उठाई थी. उन्होंने कहा था कि छात्रों पर किताबों का बोझ डालना जरूरी नहीं है. उनका मानना था कि छात्रों की असली किताबें उनका शिक्षक होता है. शिक्षक उन्हें जो आचरण और अनुभव सिखाता है, वो छात्र कभी नहीं भूलते हैं. 

स्कूलों में सेल्फ सपोर्ट एजुकेशन

महात्मा गांधी ने कहा था कि शिक्षा प्रणाली को आर्थिक रूप से खुद पर निर्भर होना चाहिए. वोकेशनल ट्रेनिंग के दौरान जो भी चीजें छात्र तैयार करते हैं, उनका इस्तेमाल स्कूल के खर्चे और शिक्षकों के वेतन के लिए होना चाहिए. इससे समाज के हर वर्ग तक शिक्षा आसानी से पहुंच पाएगी और सरकार का बोझ भी कम होगा.

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