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Exclusive : टीचर्स को ट्रेनिंग नहीं, लेकिन बच्चों पर एक्सपेरिमेंट सही? CBSE की डिजिटल चेकिंग पर भड़के पेरेंट्स

CBSE Digital Marking Error : एनडीटीवी की डिबेट में पेरेंट्स और एक्सपर्ट डॉ. एस के दत्ता ने बिना टेस्टिंग तकनीक लागू करने की आलोचना की और टीचर्स की ट्रेनिंग पूरी होने तक ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों विकल्प खुले रखने की मांग की है.

Exclusive : टीचर्स को ट्रेनिंग नहीं, लेकिन बच्चों पर एक्सपेरिमेंट सही? CBSE की डिजिटल चेकिंग पर भड़के पेरेंट्स
डॉ दत्ता ने कहा कि OSM पर मेरा सुझाव CBSE को ये रहेगा कि इसे बच्चों पर छोड़ दें- क्या वो ऑनलाइन चेकिंग चाहते हैं या ऑफलाइन (फिजिकल).

CBSE OSM Controversey : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इन दिनों अपने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की गड़बड़ियों को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. आए दिन कॉपी चेकिंग को लेकर कोई न कोई विवाद बोर्ड के सामने खड़ा हो रहा है. वेदांत से लेकर सुजाता नाम के स्टूडेंट्स ने बाकायदा अपने X अकाउंट पर कॉपियों के स्क्रीनशॉट पोस्ट कर मार्किंग में हुई गलतियों को उजागर किया. इसके बाद सीबीएसई ने अपनी गलती मानते हुए उन स्टूडेंट्स को सही स्कैन कॉपी भी उपलब्ध कराई.

ऐसे कई और मामले हर दिन सोशल मीडिया पर छात्र और उनके पेरेंट्स शेयर कर रहे हैं, जिनमें नंबरों की गड़बड़ी ही नहीं, बल्कि कॉपियों की अदला-बदली तक के आरोप सामने आए हैं. मामला यहीं नहीं थमा. बीते दिन यानी 26 मई को एक हैकर ने यहां तक दावा कर दिया कि उसने सीबीएसई की OSM वेबसाइट को हैक कर लिया था. हालांकि, CBSE ने अपने X अकाउंट पर बयान जारी कर हैकिंग की बात से इनकार किया है.

कुल मिलाकर, सीबीएसई अपनी कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में है. इसी मुद्दे पर NDTV एंकर सुचरिता कुकरेती ने सीबीएसई के डिजिटल मार्किंग सिस्टम में आई गड़बड़ियों को लेकर बातचीत की. इस दौरान बच्चों और अभिभावकों में सीबीएसई को लेकर गुस्सा साफ नजर आया.

प्राइवेट इंस्टिट्यूट क्वालिटी दे सकते हैं, तो सरकार क्यों नहीं?

जब एंकर सुचरिता कुकरेती ने एक पेरेंट्स से पूछा क्या आपको भी लगता है कि OSM में प्रॉब्लम है? तो उनका कहना था कि प्रॉब्लम OSM की नहीं है, प्रॉब्लम इसे बिना टेस्ट किए लागू करने की है. पहले भी इन्होंने 2015 के आसपास OSM लागू किया था और अनसक्सेसफुल होने पर छोड़ दिया था. टेक्नोलॉजी से हमें आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन उसे थोरॉली (thoroughly) टेस्ट करना चाहिए था. बच्चे की एक आंसर शीट की शुरुआत किसी और की है, आगे किसी और की लगी है, कॉपियां धुंधली दिख रही हैं. हमारा साफ कहना है कि जब प्राइवेट इंस्टिट्यूट क्वालिटी दे सकते हैं, तो सरकार क्यों नहीं दे सकती? सरकार को एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना चाहिए. 

वहीं, एक पेरेंट्स ने सीबीएसई के थर्ड लैंग्वेज को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि 8वीं क्लास के बाद अचानक 9वीं में आकर एक गलत डिसिजन थोपा गया है. बच्चे तो बिल्कुल खुश नहीं हैं. 13-14 साल के बच्चे से आप अचानक कहें कि ये मत पढ़ो, वो पढ़ो, जो कि बहुत मुश्किल है. 

पहले टिचर्स को करें ट्रेंड

इस दौरान सुचारिता कुकरेती ने एजुकेशनिस्ट डॉ. एस के दत्ता से भी OSM और थर्ड लैंग्वेज पर उठ रहे सवालों को लेकर बातचीत की. जिसको लेकर डॉ दत्ता ने कहा कि OSM पर मेरा सुझाव CBSE को ये रहेगा कि इसे बच्चों पर छोड़ दें कि क्या वो ऑनलाइन चेकिंग चाहते हैं या ऑफलाइन (फिजिकल). जब तक टीचर्स पूरी तरह से ऑनलाइन चेकिंग के लिए ट्रेंड न हो जाएं, तब तक दोनों सिस्टम पैरेलल चलने चाहिए. और जहां तक थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले की बात है, मैं तो कहूंगा कि ये 9वीं से क्यों, छठी (6th) कक्षा से लागू होना चाहिए.

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