कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन हो रहा है. संसद मार्च के दौरान खूब बवाल हुआ और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी हुआ. इस पूरे मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जिक्र सबसे ज्यादा हो रहा है, प्रदर्शन करने वाले छात्र उनका इस्तीफा मांग रहे हैं. हालांकि एक दौर ऐसा भी था, जब खुद धर्मेद्र प्रधान पेपर लीक को लेकर प्रोटेस्ट को लीड कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने लाठीचार्ज का भी सामना किया. उनके छात्र राजनीति के दिनों की खूब चर्चा हो रही है.
छात्र राजनीति में कुछ ऐसे थे प्रधान
न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने उत्कल यूनिवर्सिटी में धर्मेंद्र प्रधान के जूनियर रहे प्रशांत राउत से बातचीत कर इस पूरी कहानी को आर्टिकल के तौर पर छापा है. प्रशांत राउत फिलहाल एक कॉलेज प्रिंसिपल हैं. उन्होंने बताया कि छात्र राजनीति के दिनों में धर्मेंद्र प्रधान हमेशा लोकतांत्रिक और अहिंसक विरोध-प्रदर्शन के पक्षधर रहे. हालांकि, उन्हें खुद कई बार हिंसा का सामना करना पड़ा.
यूनिवर्सिटी में हुआ था हमला
धर्मेंद्र प्रधान ने न सिर्फ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ काम किया, बल्कि 1994 से 1997 के बीच दो बार संगठन के राष्ट्रीय सचिव भी रहे. उनके साथ कॉलेज में रहे राउत बताते हैं कि यूनिवर्सिटी चुनावों के दौरान, धर्मेंद्र प्रधान की जीत तय देखकर विरोधी दल के गुंडों ने उन पर हमला कर दिया था. उस समय वे बेहद गंभीर रूप से घायल हुए थे और किस्मत से ही उनकी जान बच पाई थी.
पेपर लीक का किया था विरोध
धर्मेंद्र प्रधान के साथी बताते हैं कि, उन्होंने साल 1997 में, जब वे ABVP के राष्ट्रीय सचिव थे, तब ओडिशा में पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन किया था. उन्होंने करीब 1,500 छात्रों के साथ सचिवालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें प्रधान को कई जगह फ्रैक्चर आए और वे बुरी तरह घायल हुए.
तीन पेन रखने की आदत
ओडिशा बीजेपी के प्रवक्ता सुदीप्त कुमार राय का भी आर्टिकल में जिक्र है, जो 1985 से धर्मेंद्र प्रधान के करीबी दोस्त हैं. राय ने भी प्रधान के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताई हैं. उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान 1983 में ABVP से जुड़े थे. राय बताते हैं कि प्रधान किसी भी बैठक से पहले पूरा होमवर्क करके जाते थे. वे हमेशा अपने पास तीन रंग के पेन रखते थे. जिनमें लाल, नीला और काला पेन होता था. इनका इस्तेमाल वो दस्तावेजों में अलग-अलग हिस्सों को मार्क और एनालाइज करने के लिए करते थे.
मुकू भाई के नाम से थे मशहूर
ओडिशा में धर्मेंद्र प्रधान मुकू भाई के नाम से मशहूर थे. आज भी उनके करीबी दोस्त उन्हें यही कहकर बुलाते हैं. ओडिशा में दोस्तों के बीच प्यार से 'मुकू' (Muku) और सम्मान देने के लिए 'भाई' कहा जाता है. राय बताते हैं कि जब वो धर्मेंद्र प्रधान के गृहनगर तालचर जाते थे, तो प्रधान के पिता (पूर्व केंद्रीय मंत्री देबेंद्र प्रधान) और उनकी मां बसंत मंजरी प्रधान सभी कार्यकर्ताओं की बहुत देखभाल करते थे. धर्मेंद्र प्रधान की पत्नी मृदुला प्रधान भी शादी से पहले काफी समय तक ABVP में सक्रिय भूमिका में रही हैं.
विरोध और छात्र आंदोलन को अनुभव
धर्मेंद्र प्रधान भले ही इस वक्त छात्रों और प्रदर्शनकारियों के निशाने पर हैं, लेकिन उन्हें ऐसे विरोध और छात्र आंदोलन का अनुभव है. उनके दोस्तों ने भी यही माना है कि छात्र राजनीति का अनुभव होने के कारण प्रधान छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और असहमति के अधिकार को समझते हैं. जब वो पेट्रोलियम मंत्री थे और तेल की कीमतें बढ़ रही थीं, तब भी उन्होंने शांत रहकर यह समझाया कि महामारी के दौर में सरकार को संसाधनों की जरूरत है और देश को भविष्य की ओर ले जाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ते हैं. अब देखना होगा कि 18 साल की उम्र में छात्र राजनीति शुरू करने वाले धर्मेंद्र प्रधान इस बार छात्रों की नाराजगी को कैसे दूर करते हैं.
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