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क्यों न स्कूल का मैनेजमेंट सरकार अपने हाथ में ले: दिल्ली सरकार ने निजी स्कूल को थमाया नोटिस, जानें पूरा मामला

दिल्ली सरकार ने विकासपुरी के एक प्राइवेट स्कूल को फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के बिना 43 क्लासरूम चलाने को लेकर नोटिस जारी किया है. शिक्षा निदेशालय ने स्कूल को जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया है.

क्यों न स्कूल का मैनेजमेंट सरकार अपने हाथ में ले: दिल्ली सरकार ने निजी स्कूल को थमाया नोटिस, जानें पूरा मामला
शिक्षा निदेशालय की एक कमेटी ने विकासपुरी में एक स्कूल का सरप्राइज इंस्पेक्शन किया था. 

दिल्ली सरकार ने विकासपुरी के एक प्राइवेट स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. ये नोटिस फायर सेफ्टी को लेकर जारी किया गया है. दरअसल जांच में पता चला कि स्कूल बिना फायर सेफ्टी मंजूरी के 43 क्लासरूम चला रहा था. शिक्षा निदेशालय ने स्कूल को जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया है और पूछा है कि स्कूल का मैनेजमेंट सरकार अपने हाथ में क्यों न ले ले. सरकार के मुताबिक, स्कूल के पास 39 कमरों के लिए फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) था, लेकिन जांच के समय वहां 82 कमरे चल रहे थे. यानी 43 कमरे ऐसे थे जो कि जरूरी फायर मंजूरी के बिना चलाए जा रहे थे. 

शिक्षा निदेशालय की एक कमेटी ने विकासपुरी में एक स्कूल का सरप्राइज इंस्पेक्शन किया था. इस दौरान स्कूल की जांच की गई और कई सारी कमियां पाई गई. टीम को एक टिन-शेड का स्ट्रक्चर मिला, जिसमें 30 कमरे थे. साथ ही एक कथित तौर पर बिना इजाजत वाला बेसमेंट और तीसरी मंजिल भी थी. जांच में ये पाया गया कि कुछ क्लासरूम में बाहर निकलने का सिर्फ एक ही दरवाजा था. फायर इंजन और इमरजेंसी गाड़ियों के लिए बने रास्ते बंद थे. स्कूल बिना मंजूरी के बोरवेल भी चला रहा था. 2023 में मान्यता खत्म होने के बाद भी क्लासें चलती रहीं थी. सरकार ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी क्लासों के लिए स्कूल की प्रोविजनल मान्यता 31 मार्च, 2023 को खत्म हो गई थी. हालांकि, आरोप है कि मान्यता खत्म होने के बाद भी स्कूल ये क्लासें चलाता रहा था.

फीस में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी

जांच समिति ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल ने शिक्षा निदेशालय की मंजूरी के बिना फीस बढ़ाई. स्कूल ने कोविड-19 महामारी के दौरान फीस में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की. स्मार्ट क्लासरूम फीस के तहत ली जाने वाली रकम को दोगुना कर दिया. विभाग ने यह भी दावा किया कि शिक्षकों को सरकारी वेतनमान के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा था.  कर्मचारियों के वेतन में चार महीने तक की देरी हुई थी.

इस पूरे मामले में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, "हमारी सरकार बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह के समझौते को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी. यह स्कूल बिना किसी फायर सेफ्टी मंजूरी के दर्जनों गैर-कानूनी क्लासरूम चला रहा था. जिससे रोजाना हजारों बच्चों की जान जोखिम में पड़ रही थी. हम अपने छात्रों की सुरक्षा के लिए स्कूल का मैनेजमेंट पूरी तरह से अपने हाथ में लेने के लिए तैयार हैं."

शिक्षा निदेशालय ने स्कूल से जवाब मांगा है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 20 के तहत दिल्ली सरकार को स्कूल का मैनेजमेंट अपने हाथ में क्यों नहीं लेना चाहिए. रियायती दरों पर दी गई सरकारी जमीन की लीज रद्द कर दे. अधिकारियों ने कहा कि स्कूल का जवाब मिलने के बाद या सात दिन की समय-सीमा खत्म होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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