"जब सऊदी अरब में रह रहे एक बच्चे के पिता ने मुझसे संपर्क किया और बताया कि वहां बहुत से बच्चों का CBSE ने रिजल्ट ही नहीं दिया. तो मुझे विश्वास नहीं हुआ. फिर जब बच्चे की मार्कशीट देखी, तो ये बात सच निकली. बच्चे को बिना नंबरों वाली मार्कशीट दी गई है". अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में बच्चे की और से याचिका दायर की गई है. इस याचिका पर आज सुनवाई की जानी है. वकील विनीत जिंदल ने NDTV को बताया कि स्टूडेंट की तरफ से पिटीशन फाइल की गई है. इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. इससे पहले दिल्ली के एक छात्र को भी ब्लैंक मार्कशीट दे दी गई थी. CBSE ने खाली मार्कशीट जारी कर दी और दिल्ली का ये छात्र डिप्रेशन में चले गया. वहीं अब सऊदी अरब में CBSE से पढ़ रहे बच्चे भी कुछ इस तरह की परिस्थितियों से गुजर रहे हैं.

क्या है दिल्ली के छात्र का मामला
दिल्ली के 12वीं के छात्र तनिष्क के 81 फीसदी नंबर आए लेकिन उसे ब्लैंक मार्कशीट जारी कर दी गई. रिजल्ट आया तो खाली मार्कशीट मिली. इससे तनिष्का डिप्रेशन में चले गया. एक सप्ताह बाद दोबारा रिजल्ट दिया गया. फिर छात्र ने बताया कि नंबर कम दिए. जब छह विषय की आंसर शीट की स्कैन्ड कॉपी के लिए अप्लाई किया, तब पांच विषय की कॉपी दी गई. बायोलॉजी की आंसर शीट गायब थी. आंसर शीट मिलने में देरी होने पर Rechecking का फ़ार्म नहीं भर पाए. क्योंकि आवेदन करने की समय सीमा निकल चुकी थी.
तनिष्क के पिता सचिन ने बताया कि परिणाम आने से लेकर अब पुनर्मूल्यांकन तक इतना बेटा परेशान हो गया है कि वो डिप्रेशन में हैं. हम कई बार उसे समझाते हैं लेकिन उसे लगता है कि उसी के साथ ऐसा क्यों हो रहा है.
सचिन ने कहा कि CBSE में नियम है कि जितने विषय की कॉपी मांगी है, उतने विषय का अब पुनर्मूल्यांकन करा सकते हैं. अब पांच विषय की कॉपी आई तो हम इसे भी नहीं भर सकते हैं.
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