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CBSE Result 2026: एक और बड़ी लापरवाही! कॉपियों से पन्ने गायब, सही जवाबों पर भी नहीं मिले नंबर, दांव पर छात्रों का भविष्य?

CBSE रिजल्ट के बाद री-इवैल्युएशन में बड़ी लापरवाही. कॉपियों से पन्ने गायब और सही जवाबों पर भी नहीं मिले नंबर. जानें छात्रों और अभिभावकों का फूटा गुस्सा.

CBSE Result 2026: एक और बड़ी लापरवाही! कॉपियों से पन्ने गायब, सही जवाबों पर भी नहीं मिले नंबर, दांव पर छात्रों का भविष्य?
यह कोई छोटी-मोटी प्रशासनिक चूक नहीं है. यह हजारों स्टूडेंट्स के करियर, उनकी मानसिक सेहत और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है.

CBSE Board Exam Evaluation 2026 : जब सही जवाब लिखने पर भी जीरो मिले और आंसर-शीट से पन्ने ही गायब हो जाएं, तो कोई छात्र किस पर भरोसा करे? यह दर्द और गुस्सा इस समय देश के हजारों सीबीएसई (CBSE) छात्रों और उनके अभिभावकों का है. बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद री-इवैल्युएशन के लिए मंगवाई गई स्कैन कॉपियों ने सीबीएसई की पोल खोलकर रख दी है. हर दिन कोई न कोई कॉपियों की चेकिंग से लेकर मिसमैच से जुड़े विवाद उजागर हो रहे हैं. अभी वेदांत का मामला पूरी तरीके से शांत नहीं हुआ गीतू मोजा नाम की महिला ने सीबीएसई की कार्यशैली पर सवाल उठा दिया है. 

गीतू मोजा ने एक्स एकाउंट पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए बताया कि जब उन्होंने अपनी बेटी की चार विषयों की स्कैन कॉपियां देखीं, तो वे दंग रह गई. एक सब्जेक्ट की कॉपी से पूरा का पूरा 'पेज नंबर 22' ही गायब है. हद तो तब हो गई जब कई विषयों में छात्रों के जवाब आधिकारिक आंसर-की (Official Answer Key) से हूबहू मिलने के बावजूद उन्हें नंबर नहीं दिए गए. और यह समस्या सिर्फ एक पेपर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई अलग-अलग विषयों में भी यही दिक्कत देखने को मिल रही है.

अभिभावकों का सवाल

गीतू ने सिस्टम से सवाल करते हुए अपने पोस्ट में आगे लिखा है कि कॉम्पिटिटिव एग्जाम और कॉलेज में एडमिशन पर ध्यान देने के बजाय, स्टूडेंट्स को इधर-उधर भटकने पर मजबूर होना पड़ रहा है, सिर्फ यह समझने के लिए कि उनके सही जवाबों को नजरअंदाज क्यों किया गया या पेज कैसे गायब हो गए.

क्या अधिकारियों को इस बात का जरा भी अंदाजा है कि 12वीं क्लास के किसी स्टूडेंट के लिए 30-35 नंबर कितने मायने रखते हैं, जिसका पूरा भविष्य और एडमिशन की प्रक्रिया इन्हीं नंबरों पर टिकी होती है? यह कोई छोटी-मोटी प्रशासनिक चूक नहीं है. यह हजारों स्टूडेंट्स के करियर, उनकी मानसिक सेहत और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है.

ऐसे सिस्टम पर शर्म आती है जो लगातार स्टूडेंट्स को निराश करता आ रहा है. और उन लोगों पर भी शर्म आती है जो इस सिस्टम की बागडोर संभाले हुए हैं, लेकिन फिर भी चुपचाप तमाशा देख रहे हैं, जबकि हजारों युवा स्टूडेंट्स को चिंता और अनिश्चितता के भंवर में धकेला जा रहा है.

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