झारखंड सरकार के कर्मचारी अभय कुमार तिवारी को राज्य के क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने गिरफ्तार किया है. CID का आरोप है कि अभय कुमार तिवारी JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित हेरफेर कराने वाले एक संगठित सिंडिकेट का संचालन करते थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रैकेट करीब 40 करोड़ रुपये का था और इसके जरिए अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें परीक्षा में फायदा पहुंचाया जाता था. CID की जांच में सामने आया है कि अभय कुमार तिवारी ने पिछले 13 वर्षों में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं.
अब जांच एजेंसी इसी रिकॉर्ड को भी संदेह के दायरे में रखकर जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि इन परीक्षाओं में सफलता और कथित सिंडिकेट के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है.
नेटवर्क में कई लोग शामिल
जांच एजेंसी का दावा है कि अभय कुमार तिवारी के नेटवर्क में कई लोग शामिल थे, जो प्रश्नपत्र लीक कराने, परीक्षाओं में हेरफेर करने और अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये वसूलने का काम करते थे. CID अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
छात्रों का आंदोलन जारी
झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे हैं. छात्र लगातार परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं. ऐसे समय में गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी को जांच का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है.
CID की कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि पूछताछ में पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं. जांच एजेंसी अभी तक 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और आरोपी से पूछताछ कर पूरे रैकेट की परतें खोलने में जुटी है.
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