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बस स्टैंड पर दिनदहाड़े कत्ल, 31 दिन में आया फैसला, कोर्ट ने आरोपी फैसल लाखानी को उम्रकैद की सुनाई सजा

गुजरात के भावनगर एसटी बस स्टैंड पर 3 सितंबर को 40 वर्षीय काजल बरैया की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी फैयसल लाखानी को प्राकृतिक जीवन के अंत तक कारावास की सजा सुनाई है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद महज 31 दिनों में मुकदमे की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया गया.

बस स्टैंड पर दिनदहाड़े कत्ल, 31 दिन में आया फैसला, कोर्ट ने आरोपी फैसल लाखानी को उम्रकैद की सुनाई सजा
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गुजरात के भावनगर में हुए चर्चित काजल बरैया हत्याकांड में अदालत ने बेहद तेजी दिखाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. भावनगर की अदालत ने आरोपी फैसल लाखानी को 40 वर्षीय काजल बरैया की हत्या के मामले में उसकी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. खास बात यह रही कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद महज 31 दिनों के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर अदालत ने फैसला सुना दिया.

यह मामला 3 सितंबर का है, जब भावनगर स्टेट ट्रांसपोर्ट (एसटी) बस स्टैंड पर काजल बरैया पर फैसल लाखानी ने कथित तौर पर जानलेवा हमला कर दिया था. जांच में सामने आया कि फैसल को काजल और रवि बरैया उर्फ रवि बड़ा के बीच करीबी संबंधों को लेकर शक था. इसी शक ने हिंसक रूप ले लिया और उसने सार्वजनिक जगह पर काजल पर हमला कर दिया. घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई थी. बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया.

हत्या के बाद क्या किया?

हमले के बाद फैसल काजल को अस्पताल लेकर पहुंचा और दावा किया कि वह पत्थर के स्लैब पर गिरकर घायल हुई है. उसने पोस्टमॉर्टम न कराने का भी दबाव बनाया. हालांकि काजल की हालत गंभीर थी और बाद में उसकी मौत हो गई. इसके बाद 4 सितंबर को नीलमबाग पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. पुलिस इंस्पेक्टर दीपक उंधाड़, पीएसआई ए.जी. ब्रीड और अन्य अधिकारियों ने जांच की कमान संभाली. पुलिस ने बस स्टैंड पर घटनास्थल का पुनर्निर्माण कर पूरी घटना की कड़ियां जोड़ीं. सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक जांच और अन्य सबूतों का मिलान किया गया.

फोरेंसिक विशेषज्ञों ने साफ पाया कि काजल के शरीर पर मौजूद चोटें साधारण गिरने से नहीं हो सकती थीं. इस निष्कर्ष ने फैसल की कहानी को पूरी तरह झूठा साबित कर दिया.

गवाह को अगवा कर मुकदमा प्रभावित करने की कोशिश

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ. आरोप है कि फैसल ने जेल में रहते हुए अपने परिजनों के जरिए मुख्य गवाह रवि बरैया को अगवा कराने की साजिश रची. रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत में रवि की गवाही से कुछ दिन पहले फैसल के भाई डिडु ने ऑटोरिक्शा में उसे उठाकर छिपा दिया. इस कथित साजिश में फैसल की मां शहनाजबेन का भी नाम सामने आया. उद्देश्य यह था कि रवि अदालत तक न पहुंच सके और उसकी गवाही न हो पाए.

हालांकि पुलिस को अपहरण की जानकारी मिल गई और दबाव बढ़ने पर रवि को छोड़ दिया गया. इसके बाद वह अदालत पहुंचा और उसने महत्वपूर्ण गवाही दी, जो अभियोजन पक्ष के लिए बेहद अहम साबित हुई.

7 साल के बच्चे की गवाही

मुकदमे की सुनवाई के दौरान जांचकर्ताओं ने काजल के सात वर्षीय बेटे को खोजकर अदालत में पेश किया. बच्चे ने न्यायाधीश के सामने स्पष्ट कहा कि काजल उसकी मां थीं. उसने यह भी कहा कि फैसल उसका पिता नहीं है. बच्चे ने विनोद को अपना वास्तविक पिता बताया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस गवाही ने मामले की पृष्ठभूमि और संबंधों से जुड़े कई पहलुओं को स्पष्ट करने में मदद की.

मामले में कुल 31 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. इनमें आसपास के पान पार्लर संचालक, मोबाइल दुकान संचालक और चार स्वतंत्र पंच गवाह भी शामिल थे. सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही ने अभियोजन के दावों को मजबूत आधार दिया.

विशेष लोक अभियोजक उत्पल दवे ने अदालत में पक्ष रखा. अभियोजन ने तर्क दिया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की भूमिका को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं छोड़ते. अदालत भी प्रस्तुत सबूतों से संतुष्ट हुई और आरोपी को दोषी ठहराया.

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