अफगानिस्तान का जिक्र आपको जरूर काबुलीवाला की कहानी या मशहूर नॉवेल काइट रनर की याद दिलाता होगा, लेकिन वर्ल्ड कप में पहली बार खेल रही अफगान टीम का असल किरदार उस सबमें कई नए रंग जोड़ देता है।
बांग्लादेश के खिलाफ वर्ल्ड कप 2015 में अपना पहला मैच खेलने उतरी अफगान टीम का जज्बा देखने लायक था। यूं तो ये मैच ऑस्ट्रेलिया के एक छोटे शहर कैनबरा में आयोजित किया गया, लेकिन पश्तो में नारे लगाते फ़ैन्स ने इस मैच को किसी लिहाज़ से छोटा नहीं रहने दिया।
हमारी मुलाक़ात हुई एक ऐसे ही फ़ैन्स के ग्रुप से जो तादाद में बांग्लादेशी फ़ैन्स के मुक़ाबले लगभग दस फ़ीसदी थे, लेकिन जब-जब उनकी टीम को कामयाबी मिलती वह अपने संगीत और अपनी ज़ुबान से मैदान का नज़ारा ही बदल देते।
मेलबर्न और सिडनी से अफगान मूल के लगभग दो हज़ार फ़ैन्स यहां मैच देखने पहुंचे। हाथों में ढोल और अपने देश का झंडा और ज़ुबां पर अफ़ग़ानिस्तान पाइन्दाबाद का नारा। ऐसे लम्हों के लिए शायद ये फ़ैन्स बरसों से इंतज़ार कर रहे थे। फैन्स के इन जमावड़ों में ज़्यादातर लोग मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में टैक्सी ड्राइवर, सिक्योरिटी गार्ड या डिपार्टमेंटल स्टोर्स में काम करते हैं।
इन्हीं में से एक रीदी नरीरी ने कहा - (quote) हमारी टीम ने पहली बार इतने बड़े स्टेज पर जगह पाई है। अब वो जीते या हारे, हम आख़िरी लम्हों तक उसका हौसला बढ़ाते रहेंगे।
काबुल टू कैनबरा के इस सफ़र में अफ़ग़ानिस्तान की टीम ने अपने फ़ैन्स को देश से हज़ारों मील दूर भी जश्न मनाने की वजह दी। एक चीज़ और, अगर आपने अफ़ग़ानिस्तान का राष्ट्रीय गीत कभी नहीं सुना है, तो यूट्यूब पर सर्च करके ज़रूर सुनें।
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