नई दिल्ली: नोटबंदी का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर उस तरह नहीं है जिस तरह दूसरे सेक्टरों पर है. बेशक, शोरूम में कुछ कम ग्राहक दिख रहे हैं. अब जो भी कार लेने आ रहा है उसके पास चेक या लोन से ही कार लेने का विकल्प है.
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स का मानना है कि कुछ हफ़्तों बाद ये असर भी बाक़ी नहीं रहेगा. जानकारों का कहना है कि अभी लग्जरी कारों और ग्रामीण इलाकों में दो पहिया वाहनों के बाज़ार पर कुछ चोट पड़ी है. लेकिन सियाम का आकलन है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में रिवाइवल दिख रहा है.
2016-17 में बिक्री की बढ़ोतरी दर के दो अंकों में पहुंचने की उम्मीद है. उम्मीद है कि पहली बार 2016-17 में देश में गाड़ियों की बिक्री 30 लाख पार कर जाएगी. 2015-16 में बिक्री का आंकड़ा 28 लाख से कम रहा है. इस दिवाली तक इस साल गाड़ियां अच्छी बिकीं लेकिन अब कतारें एटीएम और बैंकों के आगे हैं. जब तक बाज़ार में नया कैश नहीं आता, बिक्री की गाड़ी मद्धिम रहेगी.
सेक्टर के लोगों का कहना है कि फेस्टिव सीजन खत्म हो गया है जो काफी अच्छा रहा है. अब बाजार दिसम्बर में ही ऊपर जाएगा और उम्मीद है कि हालात तब तक बेहतर हो चुके होगें.