यह ख़बर 09 जून, 2013 को प्रकाशित हुई थी

गूगल और फेसबुक ने कहा : व्यक्तिगत जानकारी पर समझौता नहीं

खास बातें

  • अमेरिकी सरकार द्वारा इंटरनेट कंपनियों से विदेशियों से जुड़ी सूचनाओं पर गुप्त रूप से निगरानी रखने को लेकर मचे विवाद के बीच दो बड़ी कंपनियों गूगल व फेसबुक ने दावा किया है कि वे इस तरह की किसी सरकारी योजना में शामिल नहीं हैं।
नई दिल्ली:

अमेरिकी सरकार द्वारा इंटरनेट कंपनियों से विदेशियों से जुड़ी सूचनाओं पर गुप्त रूप से निगरानी रखने को लेकर मचे विवाद के बीच दो बड़ी कंपनियों गूगल व फेसबुक ने दावा किया है कि वे इस तरह की किसी सरकारी योजना में शामिल नहीं हैं।

अमेरिका स्थित इन दोनों कंपनियों का कहना है कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बनने से पहले उन्हें इस तरह के किसी कार्य्रकम (कोड नाम प्रिज्म) की जानकारी नहीं थी।

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने शुक्रवार को अपने फेसबुक प्रोफाइल पेज पर लिखा है, फेसबुक अमेरिकी या किसी अन्य सरकार को अपने सर्वरों तक सीधे पहुंच देने के किसी भी कार्य्रकम का कभी हिस्सा नहीं रही।

मार्क ने दावा किया है, हमें किसी भी सरकारी एजेंसी से ऐसा कोई आग्रह या अदालती आदेश नहीं मिला जिसमें थोक में सूचनाएं मांगी गई हों जैसा कि रपटों के अनुसार वेरिजोन को मिला था। अगर हमें ऐसा कुछ मिलता तो हम इसका आ्रकामक विरोध करते। हमने कल से पहले प्रिज्म के बारे में सुना भी नहीं था।

गूगल के सह-संस्थापक तथा सीईओ लैरी पेज तथा मुख्य विधि अधिकारी डेविड डरूमंड ने भी आधिकारिक बयान में ऐसा ही दावा किया है। इसमें कहा है, पहली बात तो यह कि हम ऐसे किसी कार्य्रकम में शामिल नहीं हुए जिससे अमेरिकी या किसी अन्य सरकार को हमारे सर्वरों तक सीधी पहुंच मिलती।

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इसमें भी दावा किया गया है कि कल तक उन्होंने किसी प्रिज्म कार्य्रकम के बारे में नहीं सुना था। गूगल व फेसबुक का कहना है कि वे सरकारों को डेटा केवल कानूनों के हिसाब से देती हैं।