केंद्र सरकार ATF की कीमतों और एयरलाइन की लागत को लेकर कंपनियों से बात कर रही है. दरअसल, फेस्टिव सीजन में हवाई सफर महंगा हो गया है. एटीएफ यानी जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों के बीच इंडिगो ने फ्यूल सरचार्ज के नाम पर घरेलू उड़ानों में 375 रुपये से लेकर 1,300 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है. इस बीच लोग यही सवाल कर रहे हैं कि सरकार इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रही है.
इस बीच केंद्रीय सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार एटीएफ की कीमतों को लेकर एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत कर रही है. मंगलवार को उन्होंने कहा कि सरकार एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की लागत को लेकर कंपनियों से बातचीत कर रही है.
केंद्रीय मंत्री का यह बयान इंडिगो के उस कदम के बाद आया है, जिसमें एटीएफ की बढ़ी हुई कीमतों के कारण एयरलाइन ने फ्यूल सरचार्ज में इजाफा करने का ऐलान किया है.
क्या कम होंगे फ्लाइट टिकट के दाम?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ATF के दाम तेजी से बढ़े हैं. उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में आईएफक्यूएम सिम्पोजियम 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा, 'सबसे अहम मुद्दों में से एक पश्चिम एशिया का संकट है और यह कैसे एटीएफ की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है, लेकिन हम अभी भी एयरलाइंस और ओएमसी, दोनों के साथ बातचीत कर रहे हैं. देखते हैं कि बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है.'
VIDEO | Delhi: Union Minister of Civil Aviation Rammohan Naidu (@RamMNK) says, "One of the most important things is the West Asia crisis and how it's putting a big burden on ATF prices. But we are still in discussion, both with the airlines and also the OMCs. Let us see how the discussion unfolds." (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd) #Delhi
— Press Trust of India (@PTI_News) October 6, 2026
सभी पक्षों से बातचीत के बाद ही फैसला संभव
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस मामले पर कोई भी फैसला लेने से पहले नागर विमानन मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा. उन्होंने कहा, 'मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है और जब हम सभी संबंधित पक्षों का नजरिया समझ लेंगे, तब हम कोई फैसला लेंगे.'
स्पेशल एविएशन फ्यूल पर फोकस
कॉन्फ्रेंस में नायडू ने एविएशन सेक्टर के लिए सरकार के लंबे समय के विजन के बारे में बताया. इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को बढ़ावा देना, कई एयरपोर्ट हब बनाना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करना शामिल है.
उन्होंने कहा कि भारत ने नियम बनाया है कि इंटरनेशनल उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का 1 प्रतिशत हिस्सा 2027 तक SAF से आना चाहिए, जो 2028 तक 2 प्रतिशत और 2030 तक 5 प्रतिशत हो जाएगा.
इसके अलावा, सरकार सरकारी रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) के साथ ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक SAF बनाने पर बातचीत कर रही है.
उनके मुताबिक, भारत का लक्ष्य देश भर में कई एयरपोर्ट हब बनाकर ग्लोबल एविएशन हब बनना है. साथ ही, 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे के जरिए लंबी दूरी की इंटरनेशनल उड़ानों से जुड़ सकेंगे.
एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग पर मंत्री ने इवेंट में कहा कि भारत इंजन बनाने को एक अहम क्षमता मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम कर रहा है, जिसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) गतिविधियों और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी.
उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन बनाने में हुई प्रगति का जिक्र किया और कहा कि डिफेंस सेक्टर में हासिल की गई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है.
यह भी पढ़ें | इंडिगो ने 1,300 रुपये तक बढ़ा दिया फ्यूल सरचार्ज, इस तारीख से महंगा हो जाएगा फ्लाइट टिकट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं