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फिल्म के पोस्टर पर एक्टर से पहले आता था इन म्यूजिक डायरेक्टर का नाम, श्री 420, मेरा नाम जोकर, आवारा का दिया म्यूजिक, जावेद अख्तर ने किया याद

मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखी. ये पोस्ट दिवंगत संगीतकार जयकिशन को लेकर है. जयकिशन का निधन 12 सितंबर 1971 को सिर्फ 41 वर्ष की आयु में हुआ था.

फिल्म के पोस्टर पर एक्टर से पहले आता था इन म्यूजिक डायरेक्टर का नाम, श्री 420, मेरा नाम जोकर, आवारा का दिया म्यूजिक, जावेद अख्तर ने किया याद
इन म्यूजिक डायरेक्टर का एक्टर से पहले पोस्टर पर आता था नाम, जावेद अख्तर ने किया याद
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नई दिल्ली:

मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखी. ये पोस्ट दिवंगत संगीतकार जयकिशन को लेकर है. जयकिशन का निधन 12 सितंबर 1971 को सिर्फ 41 वर्ष की उम्र में हुआ था. जावेद अख्तर ने लिखा कि जयकिशन से उनका मेलजोल बहुत छोटा था, लेकिन कुछ मुलाकातों ने उन पर गहरा असर डाला था. जावेद अख्तर ने पोस्ट में कहा, '12 सितंबर 1971 को संगीत निर्देशक जयकिशन का 41 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनसे मेरी छोटी-सी पहचान थी. वे 'सीता और गीता' का म्यूजिक देने वाले थे. मैंने उन्हें पटकथा सुनाई थी, लेकिन फिर मौत उन्हें ले गई. हमारी कुछ मुलाकातों ने मुझ पर गहरा असर डाला था. वे बहुत अच्छे इंसान थे.'

यूं बनी शंकर-जयकिशन की हिट जोड़ी

जयकिशन दयाभाई पंचाल का जन्म 4 नवंबर 1929 को गुजरात में हुआ था. बचपन से ही संगीत में उनकी गहरी दिलचस्पी थी. उन्हें हारमोनियम बजाने में महारत हासिल थी. उन्होंने संगीत की औपचारिक शिक्षा ली और बाद में मुंबई आकर फिल्मी दुनिया में अपना स्थान बनाने की कोशिश की. जयकिशन की मुलाकात शंकर सिंह राम सिंह रघुवंशी से हुई. दोनों ने मिलकर शंकर-जयकिशन की जोड़ी बनाई, जिसे हिंदी फिल्म संगीत का स्वर्ण युग माना जाता है. 1949 में राज कपूर की फिल्म 'बरसात' से उनकी जोड़ी ने धूम मचाई. इसके बाद आवारा, श्री 420, संगम, मेरा नाम जोकर, जंगली, सूरज जैसी फिल्मों में संगीत दिया. 

शंकर-जयकिशन की खासियत थी कि वे भारतीय शास्त्रीय रागों को लोकप्रिय फिल्मी धुनों में ढालते थे. उनके गाने जैसे ‘आवारा हूं', ‘मेरा जूता है जापानी', ‘प्यार हुआ इकरार हुआ', ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना' आज भी लोगों की जुबान पर हैं. 

रोमांटिक धुनों के मास्टर

जयकिशन को रोमांटिक धुनों का मास्टर माना जाता था. वे बैकग्राउंड स्कोर में भी माहिर थे. उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि कई फिल्मों के पोस्टर पर एक्टर्स से पहले संगीत निर्देशकों का नाम लिखा जाता था. 1971 में जयकिशन का निधन लिवर सिरोसिस के कारण हुआ. उनके जाने के बाद शंकर ने अकेले काम जारी रखा, लेकिन हमेशा शंकर-जयकिशन के नाम से ही क्रेडिट लिया. शंकर का भी 1987 में निधन हो गया.

सीता और गीता (1972) की पटकथा सलीम-जावेद ने लिखी थी. फिल्म का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया. मूल रूप से शंकर-जयकिशन को इसका म्यूजिक देना था. लेकिन उनके असमय निधन के बाद आर.डी. बर्मन ने संगीत का जिम्मा संभाला. फिल्म हेमा मालिनी के डबल रोल की वजह से सुपरहिट रही.

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