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पत्नी कमाऊ और घर पर बर्तन धोता था ये एक्टर! 8 साल के संघर्ष के बाद बदली किस्मत, आज है नेशनल अवॉर्ड एक्टर

एक वक्त ऐसा भी था जब इस एक्टर के पास कुछ काम नहीं था. पत्नी की कमाई से घर चलता था और वह खुद बर्तन धोने से लेकर खाना बनाने तक सब संभालते थे. आखिर कैसे बदली किस्मत और बन गए करोड़ों के स्टार? पढ़िए पूरी कहानी.

पत्नी कमाऊ और घर पर बर्तन धोता था ये एक्टर! 8 साल के संघर्ष के बाद बदली किस्मत, आज है नेशनल अवॉर्ड एक्टर
पंकज त्रिपाठी की जिंदगी में एक पिलर सा रहा है पत्नी का सपोर्ट
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नई दिल्ली:

कभी जेब में इतने पैसे नहीं होते थे कि महीने का खर्च आराम से निकल सके. सपनों की नगरी मुंबई में एक छोटे से कमरे में जिंदगी गुजर रही थी. घर चलाने की जिम्मेदारी किसी और के कंधों पर थी जबकि वह शख्स हर दिन एक नए मौके की तलाश में ऑडिशन के चक्कर काटता था. वक्त ऐसा भी आया जब घर के काम करना, बर्तन धोना, खाना बनाना और उम्मीद को जिंदा रखना ही उसकी दिनचर्या बन गई. कई साल तक मेहनत का कोई बड़ा फल नहीं मिला, लेकिन उसने हार नहीं मानी. आज वही संघर्ष लोगों के लिए मिसाल बन चुका है और करोड़ों की संपत्ति का मालिक बनकर इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद कलाकारों में गिना जाता है. यह कहानी है एक्टर पंकज त्रिपाठी की.

पत्नी की कमाई से चलता था घर, पंकज संभालते थे किचन

पंकज त्रिपाठी और उनकी पत्नी मृदुला की संघर्ष भरी कहानी लोगों को खूब प्रेरित करती है. मुंबई आने के बाद पंकज को लंबे समय तक फिल्मों में काम नहीं मिला. ऐसे में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उनकी पत्नी ने संभाली. मृदुला स्कूल में पढ़ाती थीं और उनकी सैलरी से घर का खर्च चलता था जबकि पंकज घर के कामकाज संभालते थे. वह खाना बनाते, बर्तन धोते और घर की बाकी जिम्मेदारियां निभाते थे. इस दौरान उनका पूरा ध्यान सिर्फ अपनी एक्टिंग के सपने को जिंदा रखने पर था.

8 साल तक नहीं हुई ढंग की कमाई

एक इंटरव्यू में पंकज त्रिपाठी ने खुद बताया कि साल 2004 से 2010 तक उनकी कमाई बेहद सीमित रही. कई बार ऐसा मुश्किल समय भी आया जब उनके पास कोई काम नहीं था. उन्होंने स्वीकार किया कि उन मुश्किल सालों में पत्नी की कमाई ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा बनी. वहीं मृदुला ने भी खुलकर बताया कि उस समय घर चलाने की जिम्मेदारी उन्होंने उठाई, जबकि पंकज घर संभालते थे. पंकज का मानना है कि इसमें शर्म की कोई बात नहीं क्योंकि परिवार एक-दूसरे के सहयोग से ही आगे बढ़ता है.

आज भी नहीं भूले अपनी मिट्टी से जुड़ाव

सफलता मिलने के बाद भी पंकज त्रिपाठी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं. मुंबई में शानदार बंगले में रहने के बावजूद उन्होंने अपने घर में गांव की यादों को संजोकर रखा है. उनके घर में आज भी चारपाई यानी खटिया और मिट्टी के बर्तन मौजूद हैं. बिहार के गांव में स्थित उनका पुश्तैनी घर भी आज उनके दिल के बेहद करीब है. उनका मानना है कि इंसान को सफलता मिलने के बाद भी अपनी पहचान और अपनी मिट्टी को कभी नहीं भूलना चाहिए.

आज हर फिल्ममेकर की पहली पसंद

पंकज त्रिपाठी ने साल 2004 में अभिषेक बच्चन स्टारर फिल्म 'रन' से बॉलीवुड में कदम रखा था. शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे रोल मिले लेकिन अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', 'मिर्जापुर', 'स्त्री', 'ओएमजी 2' और 'क्रिमिनल जस्टिस' जैसे प्रोजेक्ट्स ने उन्हें हिंदी सिनेमा की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. साल 2023 में फिल्म मिमी के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला.

करोड़ों की संपत्ति, लेकिन सादगी अब भी वही

रिपोर्ट्स के अनुसार पंकज त्रिपाठी की कुल संपत्ति करीब 40 करोड़ रुपए है. वह एक फिल्म के लिए 3 से 4 करोड़ रुपए तक की फीस लेते हैं. हालांकि, शोहरत और दौलत मिलने के बाद भी उनकी सादगी और जमीन से जुड़ा स्वभाव आज भी लोगों का दिल जीतता है. यही वजह है कि संघर्ष से सफलता तक का उनका सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के साथ-साथ यह भी साबित करता है कि मेहनत और धैर्य का फल देर से ही सही, लेकिन जरूर मिलता है.

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