पुरानी फिल्मों के कुछ गाने ऐसे हैं, जिनके लिए समय के साथ दीवानगी बढ़ती ही जा रही है. दशक बीत गए, लेकिन उनकी धुन और बोल आज भी उतने ही ताजगी भरे लगते हैं. सड़क पर लंबा सफर हो, खिड़की से बाहर बदलते नजारे हों और दोस्तों के साथ मस्ती, ऐसे में एक खास गीत आज भी माहौल बना देता है. करीब 7 दशक पहले आए इस गाने में प्रकृति की खूबसूरती, सफर का रोमांच और जिंदगी को खुलकर जीने का एहसास है. दिलीप कुमार और वैजयंती माला की जोड़ी, मुकेश की दिल छू लेने वाली आवाज और शानदार म्यूजिक ने इस गाने को अमर बना दिया है. ये सदाबहार गाना है 'सुहाना सफर और ये मौसम हसीं.'
गाने के बिना रोड ट्रिप अधूरी
‘सुहाना सफर और ये मौसम हसीं' हिंदी सिनेमा के उन गानों में शामिल है, जिन्हें सुनते ही सफर और पहाड़ों का खूबसूरत एहसास होने लगता है. यह गाना फिल्म ‘मधुमती' का हिस्सा था और इसमें दिलीप कुमार पर इसे फिल्माया गया था. गाने के बोलों में प्रकृति और सफर के प्रति एक अलग तरह का उत्साह नजर आता है. आज जब लोग लंबी रोड ट्रिप पर निकलते हैं, तो नई पीढ़ी के गानों के साथ पुराने सदाबहार गीत भी प्लेलिस्ट में जगह बना लेते हैं. ‘सुहाना सफर और ये मौसम हसीं' उन्हीं गानों में से एक है. इसकी खासियत सिर्फ इसकी धुन नहीं, बल्कि वह एहसास है, जो इसे सुनते ही पैदा होता है. खुली सड़क हो, खूबसूरत मौसम हो और मंजिल से ज्यादा आप अपनों के साथ सफर का आनंद ले रहे हों.
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दिलीप कुमार और वैजयंती माला की यादगार जोड़ी
मधुमती में दिलीप कुमार और वैजयंती माला लीड रोल्स में नजर आए थे. दोनों की शानदार अदायगी ने फिल्म की कहानी को खास बना दिया था. फिल्म की कहानी में रोमांस, रहस्य और पुनर्जन्म का दिलचस्प मेल देखने को मिलता है. इसी के चलते मधुमती को अपने दौर की यादगार फिल्मों में गिना जाता है.
मुकेश की आवाज ने गीत में भरी जान
इस गाने को मुकेश ने अपनी खास आवाज में गाया था. उनकी आवाज में मौजूद सादगी और मिठास गीत को और भी खूबसूरत बना देती है. इसका म्यूजिक सलिल चौधरी ने दिया था, जबकि गाने के बोल शैलेंद्र ने लिखे थे. गाने की धुन और बोल मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सुनने वाला खुद को किसी खूबसूरत पहाड़ी रास्ते पर सफर करते हुए महसूस कर सकता है.
फिल्म ने जीते थे 9 फिल्मफेयर अवॉर्ड
1958 में रिलीज हुई मधुमती को दर्शकों के साथ-साथ क्रिटिक्स ने भी खूब पसंद किया था. फिल्म ने फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में शानदार प्रदर्शन किया और कुल 9 अवॉर्ड्स अपने नाम किए. फिल्म के डायरेक्टर बिमल रॉय थे. कहानी, म्यूजिक और एक्टिंग के बेहतरीन मेल ने इसे हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शामिल कर दिया है.
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