बीते जमाने के कुछ गाने इस कदर लोगों के दिलों पर छाए कि आज भी लोग उन्हें गुनगुनाते हैं. कुछ ऐसे गाने भी हैं जो लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं. आज हम ऐसे ही एक गीत के पीछे की अनसुनी कहानी को बताने जा रहे हैं. कैसे इस गाने की धुन गुरु दत्त को इतना पसंद आ गई कि धुन को सुन कर बोल लिखे गए और फिल्म में इसके लिए अलग से सिचुएशन बनाई गई. गाने को फिल्म में शामिल किया गया और आज ये गाना एक कल्ट क्लासिक सॉन्ग बन चुका है. बात 67 साल पुरानी है.
कौन सा है वो गाना?
हम जिस गीत की बात कर रहे हैं वो 1959 में रिलीज हुई गुरु दत्त की फिल्म "कागज के फूल" का हिस्सा था. इसके बोल कैफी आजमी ने लिखे थे और संगीत एस.डी. बर्मन ने दिया था. ये गाना फिल्म का सबसे पॉपुलर सॉन्ग था और आज एक आइकॉनिक गाना बन चुका है. ये गाना है, "वक्त ने किया क्या हसीं सितम, तुम रहे न तुम, हम रहे न हम."
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धुन बनने के बाद लिखा गया गीत
एक्ट्रेस शबाना आजमी के पिता, गीतकार कैफी आजमी ने यह गीत एसडी बर्मन की धुन पर लिखा था. फिल्म में इसके लिए कोई सिचुएशन नहीं थी, लेकिन गुरु दत्त को गाना इतना पसंद आया कि उन्होंने कहा, ‘गाना पूरा लिखिए, सिचुएशन मैं बना लूंगा.‘ ये गाना गुरु दत्त के करियर के सबसे यादगार गानों मे से एक बना. इस गाने को गुरु दत्त की पत्नी गीता दत्त ने अपनी आवाज दी थी.
शबाना आजमी ने शेयर किया किस्सा
दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी ने एक इंटरव्यू के दौरान इस गाने से जुड़ा किस्सा सुनाया था. उन्होंने कहा, ‘वक्त ने किया क्या हसीन सितम' गाने के पीछे एक बहुत प्यारी कहानी है. अब्बा ने बताया था कि उन्होंने यह गाना खुद लिखा था. एसडी बर्मन ने एक धुन दी थी और कैफी साहब ने उसके बोल लिखे थे. उन्होंने बस मुखड़ा ही लिखा था. गुरु दत्त को यह गाना बहुत पसंद आया. उन्होंने कहा कि उन्हें यह गाना हर हाल में चाहिए.
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