Sanjay Gupta Passes Away: बॉलीवुड में कुछ फिल्ममेकर अपनी फिल्मों से पहचान बनाते हैं, तो कुछ अपनी एक अलग दुनिया रचते हैं. संजय गुप्ता का नाम दूसरी श्रेणी में आता था. उनकी फिल्मों में मुंबई सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक किरदार बनकर सामने आती थी. गैंगवार, अंडरवर्ल्ड, बदले की आग, दमदार डायलॉग और बड़े सितारों का एक्शन. यही संजय गुप्ता की फिल्मी दुनिया की पहचान है. कांटे, शूटआउट एट लोखंडवाला, शूटआउट एट वडाला और मुंबई सागा जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई. संजय गुप्ता उन निर्देशकों में हैं, जिन्होंने बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई. आज यानी 31 अक्तूबर 2026 को संजय गुप्ता हमें छोड़कर चले गए.
1994 में शुरू हुआ सफर, 'आतिश' से मिली पहली पहचान
संजय गुप्ता ने साल 1994 में फिल्म 'आतिश: फील द फायर' से बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत की थी. इस फिल्म में संजय दत्त, आदित्य पंचोली, रवीना टंडन और करिश्मा कपूर जैसे कलाकार नजर आए थे. शुरुआती दौर में उन्होंने राम शस्त्र, हमेशा, जंग और खौफ जैसी फिल्मों के जरिए एक्शन और थ्रिलर की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश की.
लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी साल 2002 में आई फिल्म कांटे. अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, कुमार गौरव और लकी अली जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में स्टाइलिश क्राइम थ्रिलर का एक अलग अंदाज पेश किया.
यह भी पढ़ें | कांटे फिल्म के डायरेक्टर संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन, आधी रात को किचन में गिरे थे
फिल्म की कहानी छह ऐसे लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बैंक लूटने की योजना बनाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि संजय गुप्ता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म की कहानी के पीछे मुंबई में हुई एक जूलरी लूट की घटना की प्रेरणा थी. फिल्म की शूटिंग महज 33 दिनों में लॉस एंजिलिस में पूरी हुई थी.

गैंगस्टर फिल्मों के साथ बनाई अपनी अलग पहचान
कांटे के बाद संजय गुप्ता ने मुसाफिर, जिंदा और दस कहानियां जैसी फिल्मों से अपने निर्देशन का दायरा बढ़ाया. हालांकि, उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में शूटआउट एट लोखंडवाला और शूटआउट एट वडाला का नाम लिया जा सकता है.
शूटआउट एट लोखंडवाला में विवेक ओबेरॉय, अमिताभ बच्चन, संजय दत्त और तुषार कपूर जैसे कलाकार थे. वहीं शूटआउट एट वडाला में जॉन अब्राहम, अनिल कपूर, कंगना रनौत और मनोज बाजपेयी नजर आए. इन फिल्मों में मुंबई के अंडरवर्ल्ड, पुलिस और गैंगस्टर्स के बीच टकराव को बड़े पर्दे पर दिखाया गया.
संजय गुप्ता की खासियत यह रही कि उन्होंने अपनी फिल्मों में एक्शन को सिर्फ मारधाड़ तक सीमित नहीं रखा. उनकी फिल्मों में कैमरा एंगल, बैकग्राउंड म्यूजिक, डायलॉग और किरदारों की बॉडी लैंग्वेज भी कहानी का अहम हिस्सा बनते थे.
काबिल से मुंबई तक, हर बार अलग अंदाज
संजय गुप्ता ने सिर्फ गैंगस्टर फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा. साल 2015 में आई जज्बा में ऐश्वर्या राय बच्चन नजर आईं. इसके बाद 2017 में ऋतिक रोशन और यामी गौतम की काबिल आई. इस फिल्म में एक दृष्टिहीन शख्स की कहानी को बदले और संघर्ष के साथ जोड़ा गया.
साल 2021 में उन्होंने मुंबई सागा के जरिए एक बार फिर अंडरवर्ल्ड की दुनिया का रुख किया. जॉन अब्राहम, इमरान हाशमी, सुनील शेट्टी और काजल अग्रवाल की इस फिल्म में 80s और 90s के मुंबई के बदलते सामाजिक और आपराधिक माहौल को दिखाया गया.
संजय गुप्ता की फिल्मोग्राफी पर नजर डालें तो एक बात साफ नजर आती है कि उन्होंने हमेशा अपने पसंदीदा जॉनर में काम करना पसंद किया. वह रोमांस, कॉमेडी और पारिवारिक फिल्मों की भीड़ में अपनी अलग सिनेमाई पहचान बनाने में सफल रहे. अलविदा संजय, आप अपनी फिल्मों से हमेशा हमारे बीच रहेंगे.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं