कुछ अभिनेता किरदार निभाते हैं, और कुछ अभिनेता खुद को पूरी तरह उस किरदार के हवाले कर देते हैं. रणदीप हुड्डा ऐसे ही कलाकार हैं. अलग-अलग किरदारों के लिए उन्होंने कई बार अपने शरीर में बड़े बदलाव किए, नई स्किल्स सीखीं और असली जिंदगी के किरदारों की चाल-ढाल, बोलने का अंदाज, बॉडी लैंग्वेज और सोच को गहराई से समझा. उनका सिनेमा के प्रति नजरिया बेहद बारीकी वाला है. यही वजह है कि वह इंडस्ट्री के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जो हर किरदार में खुद को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखते हैं. उनके जन्मदिन पर आइए उनकी 7 ऐसी यादगार परफॉर्मेंस पर नजर डालते हैं, जो साबित करती हैं कि रणदीप हुड्डा वाकई अपने किरदारों में पूरी तरह ढल जाने के उस्ताद हैं.
1. सरबजीत - जब बदलाव ही किरदार बन गया
ओमंग कुमार की फिल्म सरबजीत में सरबजीत सिंह का किरदार रणदीप हुड्डा के सबसे हैरान कर देने वाले शारीरिक और भावनात्मक बदलावों में से एक था.
किरदार को कई साल जेल में बिताने थे, इसलिए रणदीप को एक ऐसे इंसान की तरह दिखना था, जिसका शरीर लंबे समय की कैद और यातनाओं से पूरी तरह टूट चुका हो. शूटिंग शेड्यूल में बदलाव के बाद उनके पास इस बदलाव के लिए करीब एक महीने का ही समय था. उन्होंने सिर्फ 28 दिनों में 18 किलो वजन कम किया और 94 किलो के मजबूत शरीर से बेहद कमजोर और दुबले शरीर में बदल गए.
लेकिन उनका बदलाव सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं था. उन्होंने खुद को मानसिक रूप से भी किरदार की दुनिया में ढाल लिया. उन्होंने लंबे समय तक जेल और अकेलेपन की जिंदगी जीने वाले व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज और शारीरिक हाव-भाव को समझा. बाद में उन्होंने माना कि यह अनुभव मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद मुश्किल था, लेकिन वह यह भी जानते थे कि उन्होंने जो तकलीफ झेली, वह सरबजीत के असहनीय संघर्ष का सिर्फ एक छोटा हिस्सा थी.
2. स्वातंत्र्य वीर सावरकर - जब अभिनेता बना निर्देशक
स्वातंत्र्य वीर सावरकर के साथ रणदीप हुड्डा ने अपनी कला के प्रति समर्पण को एक और स्तर पर पहुंचाया. उन्होंने सिर्फ विनायक दामोदर सावरकर का किरदार नहीं निभाया, बल्कि फिल्म का निर्देशन भी किया और निर्माता तथा सह-लेखक की जिम्मेदारी भी संभाली.
इस किरदार के लिए उन्होंने करीब 26 किलो वजन कम किया. लंबे समय तक चलने वाली शूटिंग के कारण उन्हें कई महीनों तक कम वजन बनाए रखना पड़ा. इसी दौरान वह घुटने की सर्जरी से भी उबर रहे थे और उनका वजन लगभग 62 किलो तक पहुंच गया था.
रणदीप ने बाद में यह भी साफ किया कि सिर्फ खजूर और एक गिलास दूध पर रहने वाली खबरें सही नहीं थीं और बिना डॉक्टर की सलाह के इस तरह की बेहद कठिन डाइट नहीं अपनानी चाहिए. उन्होंने बताया कि लंबे समय तक चले इस बदलाव का असर उनकी रिकवरी, जोड़ों और पाचन पर भी पड़ा. इस दौरान वह बेहोश हुए और घोड़े से गिरने की घटना भी हुई.
उनकी मेहनत सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं थी. उन्होंने सावरकर के जीवन और व्यक्तित्व पर गहराई से रिसर्च की और फिल्म के लंबे सफर के दौरान किरदार के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे.
3. एक्सट्रैक्शन - भारतीय एक्शन को ग्लोबल मंच तक ले जाना
नेटफ्लिक्स की एक्सट्रैक्शन में रणदीप ने साजू राव का किरदार निभाया, जो एक पूर्व भारतीय स्पेशल फोर्स अधिकारी और एक जटिल परिस्थितियों में फंसा पिता है.
क्रिस हेम्सवर्थ के साथ काम करते हुए रणदीप को हॉलीवुड की बड़े स्तर की एक्शन फिल्म की शारीरिक मांगों के अनुरूप खुद को तैयार करना पड़ा. उन्होंने इस भूमिका के लिए काफी ट्रेनिंग की और अपने शरीर को मजबूत बनाया.
रणदीप ने साजू को सिर्फ एक आम भारतीय किरदार की तरह पेश नहीं किया. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भारतीय एक्शन हीरो को प्रस्तुत करने के मौके के तौर पर देखा. उनका एक्शन स्टाइल जमीन से जुड़ा और प्रभावशाली रहा. फिल्म में हेम्सवर्थ के साथ उनके हाथों से किए गए एक्शन सीक्वेंस खास तौर पर चर्चा में रहे.
4. मैं और चार्ल्स - चार्ल्स शोभराज को अंदर से समझना
प्रवाल रमन की मैं और चार्ल्स में चार्ल्स शोभराज का किरदार निभाना रणदीप के लिए सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं था. उन्हें शोभराज की सोच, आकर्षण, आवाज और हाव-भाव को भी समझना था.
रणदीप ने शोभराज के इंटरव्यू देखे और उनकी बॉडी लैंग्वेज, बोलने के तरीके और व्यवहार का बारीकी से अध्ययन किया. उन्होंने किरदार के इंडो-फ्रेंच एक्सेंट और उच्चारण पर भी काफी काम किया. उस समय की रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कई महीनों तक एक्सपर्ट के साथ इसकी ट्रेनिंग ली और शूटिंग के बाहर भी इस एक्सेंट का अभ्यास किया.
उन्होंने शोभराज की हंसी जैसी छोटी-छोटी चीजों पर भी काम किया और बताया कि इसके लिए उन्हें अपनी सामान्य हंसी तक बदलनी पड़ी. उनकी तैयारी इतनी गहरी हो गई थी कि बाद में फ्रेंच एक्सेंट को थोड़ा कम करना पड़ा, क्योंकि वह भारतीय दर्शकों के लिए जरूरत से ज्यादा मजबूत हो गया था.
5. दो लफ्जों की कहानी - एक फाइटर को बिल्कुल नए सिरे से तैयार करना
सरबजीत में बेहद दुबले नजर आने से पहले रणदीप हुड्डा ने दो लफ्जों की कहानी के लिए बिल्कुल उल्टा शारीरिक बदलाव किया था.
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फाइटर का किरदार निभाने के लिए उन्होंने काफी मसल्स और ताकत बनाई. उनकी तैयारी में रोज करीब चार घंटे की ट्रेनिंग शामिल थी - सुबह दो घंटे मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स और शाम को दो घंटे बॉडीबिल्डिंग. उन्होंने खुद माना था कि यह प्रक्रिया बेहद कठिन थी.
इस बदलाव की खास बात यह थी कि उन्होंने सरबजीत से पहले दो लफ्जों की कहानी की शूटिंग की थी. यानी पहले उन्हें वजन और मसल्स बढ़ाने पड़े और उसके बाद उसी शरीर को तेजी से बदलकर काफी वजन कम करना पड़ा.
रणदीप के मुताबिक, दो लफ्जों की कहानी के लिए मसल्स बनाना कई मायनों में सरबजीत के लिए वजन कम करने से भी ज्यादा मुश्किल था. सिर्फ एक साल के अंदर उन्हें करीब 30 किलो वजन बढ़ाना और फिर कम करना पड़ा.
6. रंग रसिया - कलाकार का किरदार निभाने के लिए खुद कलाकार बनना
केतन मेहता की रंग रसिया में रणदीप हुड्डा ने मशहूर भारतीय चित्रकार राजा रवि वर्मा का किरदार निभाया. उन्होंने सिर्फ कैमरे के सामने ब्रश पकड़ने के बजाय पेंटिंग और चारकोल आर्ट की बुनियादी बातें सीखीं, ताकि एक कलाकार के काम करने के तरीके और उसकी गतिविधियों को सही तरह से समझ सकें. उन्होंने आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई के एक असिस्टेंट के साथ पेंटिंग की ट्रेनिंग भी ली.
फिल्म में उन्हें रवि वर्मा के जीवन के अलग-अलग दौर दिखाने थे. इसके लिए उनके लुक के साथ-साथ उनके हाव-भाव, व्यक्तित्व और व्यवहार में भी बदलाव करना पड़ा.
यही रणदीप हुड्डा का तरीका है - अगर किरदार चित्रकार है तो पेंटिंग सीखो, अगर फाइटर है तो फाइटर की तरह ट्रेनिंग करो, अगर किरदार ने दशकों जेल में बिताए हैं तो शरीर और दिमाग दोनों को उसी तरह बदलो और अगर किरदार का अलग एक्सेंट है तो उसे पूरी तरह सीखो.
7. लाल रंग - ऐसा किरदार जो आज भी लोगों को याद है
लाल रंग में रणदीप हुड्डा ने एक बार फिर ऐसा किरदार निभाया, जो पारंपरिक हीरो से बिल्कुल अलग था. सैयद अहमद अफजल की इस फिल्म में उन्होंने शंकर नाम के एक चालाक, करिश्माई और नैतिक रूप से जटिल ब्लड स्मगलर का किरदार निभाया.
रणदीप ने शंकर के किरदार में एक अलग तरह की कच्ची ऊर्जा, स्वैग और डार्क ह्यूमर लेकर आए. उनकी देसी हरियाणवी भाषा, बॉडी लैंग्वेज, हाव-भाव और किरदार की दुनिया पर उनकी पकड़ ने शंकर को तुरंत यादगार बना दिया.
समय के साथ लाल रंग ने एक खास कल्ट फैन फॉलोइंग बना ली और शंकर उन दुर्लभ किरदारों में शामिल हो गया, जिन्हें फिल्म रिलीज होने के लंबे समय बाद भी दर्शक याद करते हैं और पसंद करते हैं.
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