लता मंगेशकर 40 के दशक से लेकर अब तक 20 से ज्यादा भाषाओं में 30,000 से 40,000 तक गाने गाकर स्वर कोकिला का खिताब हासिल कर चुकी हैं. उन्होंने किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और मुकेश जैसे दिग्गज सिंगरों के साथ कई सफल गाने दिए. इसके कारण उनकी फीस भी लगातार बढ़ती गई. लेकिन क्या आप उस गाने के बारे में जानते हैं, जिसके लिए 3000 की रकम लता मंगेशकर को नहीं मिल पाई तो मुकेश ने 1000 रुपए में गाने को आवाज दी. आज यह गाना सदाबहार कहलाता है.
मुकेश की आवाज ने बनाया सदाबहार गाना
हम बात कर रहे हैं 1974 में आई फिल्म रजनीगंधा के गाने 'कई बार यूं भी देखा है' की, जिसे मुकेश ने अपनी सुरीली आवाज से सदाबहार बना दिया. इस फिल्म की गिनती उनमें आती थी, जो अपने गानों के दम पर मशहूर हुई. हालांकि इस फिल्म के बनने के पीछे कई चुनौतियां आईं, जैसे इसके नाम को लेकर फाइनेंसर सवाल करने लगे थे और स्टारकास्ट को लेकर भी किसी में उत्साह नहीं था. लेकिन, फिल्म के गानों की बात अलग थी. इस फिल्म का ही गाना है 'कई बार यूं भी देखा है' जिसे मुकेश साहब ने अपनी आवाज दी थी.
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लीड एक्ट्रेस के लिए चुनी गई थी कोई और एक्ट्रेस
साल 1974 में फिल्म रजनीगंधा आई, जिसे बासु चैटर्जी ने डायरेक्ट किया और विद्या सिन्हा, अमोल पालेकर और दिनेश ठाकुर जैसे कलाकार नजर आए. कहा जाता है कि इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस का रोल विद्या सिन्हा से पहले अपर्ना सेन करने वाली थीं. जबकि उनसे पहले भी कई 4-5 और लड़कियों को देखा गया था और फिर अपर्ना सेन का नाम चुना गया. लेकिन अपर्ना सेन की मांगे ज्यादा थीं और वे फिल्म में अपोजिट रोल के लिए किसी बड़े हीरो को चाहती थीं. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, जिसके चलते अपर्ना की बजाय विद्या को चुना गया.
डायलॉग से आए गाने के बोल का आइडिया
गाने की बात करें तो कई बार यूं भी देखा है के संगीतकार सलिल चौधरी थे, वहीं योगेश ने गाने के बोल लिखे और मुकेश ने आवाज दी थी. इस गाने को लिखने का आइडिया लिरिसिस्ट योगेश को फिल्म के ही एक डायलॉग से आया था. किसी तरह के एक्शन से हटकर कोई सीन होता है तो उसके लिए गीत लिखना थोड़ा मुश्किल होता है इसीलिए योगेश को बार-बार स्क्रिप्ट को पढ़ना पड़ रहा था. वो कुछ ढूंढ रहे थे जो उन्हें मिल भी गया. फिल्म में एक डायलॉग था, जो सामने है वो ही सच है. इसी एक डायलॉग पर योगेश साहब ने गाने की लाइनें लिख डालीं.
लता मंगेशकर की फीस ने बदली मुकेश की किस्मत
मुकेश चंद माथुर उर्फ मुकेश की जिंदगी को वो गाना जिसे उन्होंने किसी हीरो के लिए नहीं बल्कि कहानी के लिए गाया था. यह वो गाना है जिसने लता मंगेशकर के टाइटल ट्रैक से लाइमलाइट लेकर मुकेश को दी. लेकिन खास बात यह थी कि इस गाने को भी लता मंगेशकर से गवाया जाना था. दरअसल, लता मंगेशकर ने फिल्म का टाइटल ट्रैक रजनीगंधा फूल तुम्हारे गाया था, उन्हें दूसरा गाना भी गाने को दिया गया. लेकिन उन्होंने 3000 रुपये फीस के तौर पर मांगे जोकि बहुत बड़ी रकम नहीं थी. लेकिन रजनीगंधा कम बजट की फिल्म होने के कारण फिल्म को फाइनेंस करने में दिक्कत आई. ऐसे में मुकेश इस गाने को गाने के लिए सिर्फ 1000 रुपए में राजी हो गए और इस तरह कई बार यूं भी देखा है गाना मुकेश साहब का हो गया.
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