हिट वेब सीरीज ‘मिर्जापुर' के बाद अब इसी नाम की फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है. हालांकि, दर्शकों को यह समझने की जरूरत है कि यह वही ‘मिर्जापुर' नहीं है, जिसे उन्होंने ओटीटी पर देखा था. वेब सीरीज की वजह से मिर्जापुर काफी मशहूर थी, बाकि मेकर्स ने इस फिल्म का प्रमोशन भी काफी जोर-शोर से किया गया. वेब सीरीज के बाद अब इसकी कहानी को बड़े पर्दे पर आगे बढ़ाया गया है. फिल्म की कहानी कमोबेश वही है और यह अपराध की दुनिया के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म के ज्यादातर किरदार और कलाकार भी वही हैं, जिन्हें दर्शक वेब सीरीज में देख चुके हैं.
फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा, अभिषेक बनर्जी, श्रेया पिलगांवकर और श्वेता त्रिपाठी जैसे कलाकार नजर आते हैं. इसके साथ ही कुछ नए कलाकार भी कहानी का हिस्सा बने हैं. वेब सीरीज में अली फजल के भाई का किरदार निभाने वाले विक्रांत मैसी की जगह यहां जितेंद्र कुमार नजर आते हैं. इसके अलावा फिल्म में रवि किशन और सोनल चौहान भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं.
‘मिर्जापुर' की कमियां
फिल्म की कमियों की बात करें तो सबसे पहले इसकी लंबाई का जिक्र करना जरूरी है. फिल्म का रनटाइम करीब तीन घंटे 12-17 मिनट का है. जाहिर तौर पर यह एक लंबी फिल्म है. हालांकि, खास तौर पर पहले हाफ में फिल्मकारों ने ‘मिर्जापुर' की दुनिया को विस्तार से दिखाने की कोशिश की है.
जिन दर्शकों ने वेब सीरीज नहीं देखी है, उनके लिए यह हिस्सा ठीक है, लेकिन जिन्होंने सीरीज पहले से देख रखी है, उन्हें कुछ जगहों पर ऐसा महसूस हो सकता है कि वे वही रिश्ते और वही चीजें दोबारा देख रहे हैं. ऐसे दर्शकों को कुछ हिस्से थोड़े बोरिंग लग सकते हैं.
फिल्म खत्म होने के बाद भी इसका थोड़ा हिस्सा बाकी रह जाता है, जो कुछ दर्शकों को खिंचा हुआ यानी ‘ड्रैग्ड' लग सकता है. हालांकि, ये कमियां बहुत छोटी हैं और फिल्म के अनुभव को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं.
फिल्म की खूबियां
‘मिर्जापुर' की सबसे बड़ी खूबियों में इसकी बेहतरीन राइटिंग, मजबूत स्क्रिप्ट, अच्छा निर्देशन और दमदार डायलॉग शामिल हैं. फिल्म का लेखन कहानी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यही इसकी सबसे मजबूत कड़ियों में से एक है.
अभिनय की बात करें तो अली फजल, दिव्येंदु शर्मा और पंकज त्रिपाठी ने शानदार काम किया है. रवि किशन भी अपने अभिनय से प्रभावित करते हैं. सोनल चौहान भी अपनी भूमिका में छाप छोड़ती हैं.
हालांकि श्रेया पिलगांवकर और श्वेता त्रिपाठी के पास इस फिल्म में करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है. जिस तरह वेब सीरीज में आगे कहानी को बढ़ाया गया था, उसी तरह अगर फिल्म के सीक्वल आते हैं तो संभव है कि आगे इन दोनों कलाकारों को ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिलें.
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर जॉन स्टीवर्ट एडुरी ने दिया है, जो अच्छा है. इसके अलावा फिल्म के गाने भी कहानी के साथ ठीक बैठते हैं.
कैसी है ‘मिर्जापुर'?
कुल मिलाकर ‘मिर्जापुर' एक मनोरंजक फिल्म है. फिल्म में बेहतरीन लेखन, दमदार अभिनय और ऐसे कई पल हैं, जो दर्शकों को तालियां और सीटियां बजाने का मौका देते हैं. कुछ छोटी कमियों और लंबी अवधि के बावजूद यह फिल्म देखी जा सकती है.
रेटिंग: साढ़े तीन स्टार(3.5)
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