अमृता सिंह अपने समय की उन एक्ट्रेसेस में से एक हैं जिन्होंने अपनी एक्टिंग से दर्शकों को दीवाना बना दिया था. उनके एक्टिगं करियर में कई ऐसे गाने भी आए जो सालों बाद भी लोगों के जहन में बसे हुए हैं. आज हम अमृता सिंह के एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जो 38 साल पहले आया था. 1988 में आई फिल्म का गाना आज भी पुराने प्यार और रिश्तों की याद दिलाता है. लता मंगेशकर और मनमोहन सिंह की आवाज में सजे इस गीत के बोल इतने प्यारे थे कि लोगों के दिलों को छू पाए. यही वजह है कि यह गीत आज भी रेडियो और पुराने हिंदी गानों की प्लेलिस्ट में सुनाई देता है. तो चलिए जानते हैं किस फिल्म का है ये गाना जो आज भी प्यार करने वालों की पसंद बना हुआ है.
प्यार को उम्रभर निभाने की बात करता है गाना
साल 1988 में आई फिल्म वारिस को रवींद्र पीपट ने डायरेक्ट किया था. फिल्म का संगीत उत्तम सिंह और जगदीश सोधी ने तैयार किया था और इस फिल्म के गीतों के बोल लिखे थे वर्मा मलिक ने. फिल्म में कुल 9 गाने थे और सभी सुपरहिट हुए थे. लेकिन इसका एक गाना 'मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम, तेरे नाम से शुरू तेरे नाम पे खत्म' गाना लोगों की कुछ ज्यादा ही पसंद आया था. इस गाने की सबसे खास बात इसके सीधे-सादे बोल हैं. वर्मा मलिक ने गाने के बोलों को किसी बड़े वादे या दिखावे की बजाय जिंदगीभर साथ निभाने की भावना से जोड़ा. गाने में प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे की खुशी और गम को अपना मानते नजर आते हैं. इसका यही अंदाज इसे फिल्मी रोमांटिक गाने से आगे ले जाता है.
लता मंगेशकर और मनमोहन सिंह की आवाज
'मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम, तेरे नाम से शुरू तेरे नाम पे खत्म' गाने को लता मंगेशकर और मनमोहन सिंह ने गाया था. गाने में अपने प्रेमी के लिए जिस तरह से अपनी मोहब्बत का इजहार किया, लोगों को इतना पसंद आया था कि यह गीत आज भी रेडियो और पुराने हिंदी गानों की प्लेलिस्ट में सुनाई देता है. इस गाने को राज बब्बर और अमृता सिंह पर फिल्माया गया था. फिल्म में स्मिता पाटिल, राज किरण, अमरीश पुरी और कुलभूषण खरबंदा जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में थे.
पंजाबी उपन्यास पर बनी थी फिल्म
फिल्म 'वारिस' को रविंद्र पीपत ने डायरेक्ट किया था और इसकी कहानी सोहन सिंह हंस के उपन्यास 'कारे हाथी' पर बेस्ड थी. फिल्म में स्मिता पाटिल ने पारो, अमृता सिंह ने सीबो और राज बब्बर ने बिंदर का किरदार निभाया था. इनके अलावा राज किरण, अमरीश पुरी और कुलभूषण खरबंदा भी फिल्म का हिस्सा थे. फिल्म 6 मई 1988 को रिलीज हुई थी. फिल्म की कहानी परिवार, जमीन-जायदाद और विरासत के इर्द-गिर्द घूमती है.
38 साल बाद भी नहीं पुरानी हुई लता की आवाज
आज 38 साल बाद भी जब इसकी धुन बजती है तो पुराने प्यार, अधूरी मोहब्बत और किसी खास इंसान के साथ बिताए पलों की याद ताजा हो जाती है. शायद यही वजह है कि 'मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम/ सिर्फ 1988 का गाना नहीं रहा, बल्कि प्यार को याद करने वाला एक सदाबहार गीत बन गया है.
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