हनुमान अंश की चर्चा इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर खूब हो रही है. फिल्म ने 2 करोड़ के बजट में 82 करोड़ इंडिया नेट कलेक्शन कर लिया है. जबकि 10 लाख की ओपनिंग से फिल्म की कमाई 10 करोड़ पर 29 दिनों में पहुंच गई है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 51 साल पहले बॉक्स ऑफिस पर ऐसा ही चमत्कार देखने को मिला था. जहां सिनेमाघरों में उस फिल्म को देखने के लिए लोग चप्पल उतारकर पहुंचे तो वहीं बॉक्स ऑफिस पर 25 से 30 लाख में बनीं फिल्म ने 5 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर किया. खास बात यह है कि इस फिल्म के पॉपुलर गाने को लता मंगेशकर की बहन ऊषा मंगेषकर ने आवाज दी थी.
हनुमान अंश से पहले संतोषी मां की भक्ति में डूबे थे दर्शक
हम बात कर रहे हैं 15 अगस्त 1975 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म जय संतोषी मां की, जिसका बजट 25 से 30 लाख का बताया जाता है. जबकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 5 से साढ़े 5 करोड़ की कमाई हासिल की थी और साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई थी. वहीं पहले नंबर पर शोले थी. लेकिन प्रॉफिट में यह नंबर वन थी.
नंगे पैर पहुंचते थे दर्शक
सिनेमाघरों में 15 अगस्त 1975 को उतरी ‘जय संतोषी मां' के बारे में कई किस्से हैं. रिलीज के बाद से सिनेमाघर रौशन थे. परिवार के साथ लोग माता की गाथा को देखने के लिए पहुंचते थे. जानकारी के अनुसार, माता की लीला और चमत्कार से भरी फिल्म को देखने के लिए दर्शक थिएटर में प्रवेश करने से पहले चप्पल उतार देते थे और फिल्म शुरू होने से पहले हाथ में फूल, सिक्के लेकर बैठते थे और स्क्रीन पर माता के आने के तुरंत बाद सिक्के, माला-फूल उछालने लगते थे.
जय संतोषी मां की कहानी
हनुमान अंश की कहानी नीम करोली बाबा पर बनी है. जबकि जय संतोषी मां की कहानी देवी संतोषी पर बनी है. फिल्म की शुरुआत देवलोक से होती है. जहां भगवान गणेश के दो पुत्र शुभ और लाभ रक्षाबंधन पर बहन की मांग करते हैं. गणेश जी अपनी पत्नियों ऋद्धि-सिद्धि की मदद से संतोषी मां को जन्म देते हैं. नारद मुनि उनका नाम “संतोषी” रखते हैं, क्योंकि वे संतोष और सुख देने वाली देवी हैं. इसके बाद दिखाया जाता है कि धरती पर सत्यवती (कनन कौशल) संतोषी मां की परम भक्त हैं. संतोषी मां की कृपा से वह बिरजू (आशीष कुमार) से शादी कर लेती है, जो सात भाइयों में सबसे छोटा होता है. उसकी दो भाभियां दुर्गा और माया उससे जलती हैं और सत्यवती को सताती हैं. इसके बाद नारद मुनि के भड़काने पर तीनों देवियां सत्यवती की परीक्षा लेती हैं. बिरजू घर छोड़कर चला जाता है और तूफान में लापता हो जाता है. वहीं उसे मरा हुआ समझकर विधवा सत्यवती को परेशान किया जाता है. तब नारद उसे 16 शुक्रवार का व्रत के बारे में बताते हैं, जिसे वह पूरा करती है. फिर संतोषी मां अपने आशीर्वाद से सत्यवती की जिंदगी में बिरजू को वापस लाती हैं और उसकी जिंदगी सुख-समृद्धि से भर देती हैं.
उषा मंगेशकर का गाना हुआ पॉपुलर
हनुमान अंश की तरह फिल्म की शुरूआत काफी धीमी थी. लेकिन फिल्म के गानों ने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई. जय संतोषी मां में एक गाना सुपरहिट था, जिसके बोल थे... ‘मैं तो आरती उतारूं रे, संतोषी माता की'. यह भजन खूब पसंद किया गया. वहीं आज भी कई खास मौकों पर यह सुनने को मिल जाता है. इसे लता मंगेशकर की बहन और जानी मानी सिंगर उषा मंगेशकर ने गाया था और सी. अर्जुन ने संगीत दिया था. सिलसिला यहीं नहीं रुका और आगे चलकर इसी गाने को मंदिरों में संतोषी माता की आरती के रूप में गाया जाने लगा. इसके अलावा फिल्म में 'जय जय संतोषी माता, जय जय मां', 'यहां-वहां जहां तहां देखूं', 'करती हूं व्रत तुम्हारा', 'मदद करो संतोषी माता' गाना भी काफी पॉपुलर है.
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