बॉलीवुड में कई ऐसी एक्ट्रेस हुई हैं जिन्होंने अपनी खूबसूरती और एक्टिंग से सभी को अपना दीवाना बनाकर रख दिया. उन्ही में से एक थीं निगार सुल्ताना. बड़ी-बड़ी आंखें, मासूम चेहरा और शानदार एक्टिंग के दम पर उन्होंने 50 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. उनकी खूबसूरती की तुलना मधुबाला और वैजयंती माला जैसी एक्ट्रेसेस से की जाती थी. इन सब से अलग पर्सनल लाइफ में लिए गए कुछ फैसलों ने उनकी चमकता हुआ फिल्मी सफर अंधेरे में जा पहुंचा. आज हम आपको निगार सुल्ताना के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में आपको शायद ही पता होगा.
हैदराबाद में हुआ था निगार सुल्ताना का जन्म
21 जून 1932 को हैदराबाद में जन्मीं निगार सुल्ताना पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं. उनके पिता आर्मी में मेजर थे लेकिन जब निगार सिर्फ 10 साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया. परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने एक्टिंग का सपना नहीं छोड़ा. पिता के दोस्त जगदीश सेठी की मदद से उन्हें फिल्म 'रंगभूमि' में पहला मौका मिला. इसके बाद राज कपूर की फिल्म 'आग' ने उनके करियर को नई पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने 'बाजार', 'पतंगा', 'शीश महल', 'दमन' और 'मिर्जा गालिब' जैसी फिल्मों में काम किया.
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फिल्म की वजह से हुआ तलाक
इसी दौरान उनकी मुलाकात पाकिस्तान के मशहूर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर एस. एम. यूसुफ से हुई. दोनों ने शादी कर ली और निगार फिल्मों में एक्टिव रहीं. लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ फिल्म 'मुगल-ए-आजम' से आया. फिल्म में 'बहार' के किरदार के लिए डायरेक्टर के. आसिफ को एक खूबसूरत एक्ट्रेस की तलाश थी. के. आसिफ की पत्नी और मशहूर कथक नृत्यांगना सितारा देवी ने निगार सुल्ताना का नाम सुझाया. लेकिन निगार के पति एस. एम. यूसुफ इस फिल्म के खिलाफ थे. उन्होंने निगार के सामने शादी और फिल्म में से किसी एक को चुनने की शर्त रखी. निगार ने फिल्म को चुना और पति से तलाक ले लिया.
जब पति ने कर ली दूसरी शादी
'मुगल-ए-आजम' की शूटिंग के दौरान निगार और के. आसिफ एक-दूसरे के करीब आ गए. फिल्म पूरी होने के बाद दोनों ने शादी कर ली. इस शादी से उनकी बेटी हिना कौसर का जन्म हुआ जिन्होंने आगे चलकर फिल्मों में अपनी पहचान बनाई. लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका. बाद में के. आसिफ ने दिलीप कुमार की बहन अख्तर से शादी कर ली. इससे निगार का शादीशुदा जीवन बिखर गया.
परिवार को पालने के लिए खोली फर्नीचर की दुकान
पति से लड़ाई और अलग होने का असर उनके फिल्मी करियर पर पड़ा और धीरे-धीरे उन्हें फिल्में मिलना कम हो गई. अपने परिवार को पालने के लिए निगार ने फर्नीचर की दुकान भी चलाई. 21 अप्रैल 2000 में मुंबई में उनका निधन हो गया.
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गाने के बारे में
यह एक्ट्रेस 66 साल पहले मधुबाला के साथ Mughal-E-Azam के गाने "तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर" (Teri Mehfil Mein Kismat Aazma Kar) में नजर आई थी. साल 1960 की प्रसिद्ध ऐतिहासिक बॉलीवुड फिल्म Mughal-E-Azam का यह गाना बेहद मशहूर हुआ था. इस गाने को महान गायिका Lata Mangeshkar और शमशाद बेगम (Shamshad Begum) ने अपनी आवाज दी थी. संगीतकार नौशाद (Naushad), गीतकार: शकील बदायूंनी (Shakeel Badayuni) थे. वहीं कास्ट की बात करें तो इसमें दिलीप कुमार, मधुबाला और निगार सुल्ताना नजर आए थे. गाने के बोल मोहब्बत, उम्मीद और हिम्मत के जज्बे को बयां करता है. इसके बोल जिंदगी और इश्क की गहराइयों को छूते हैं.
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