Rakshabnadhan hits Songs: रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जिसका हर भाई बहन को इंतजार रहता है. चाहे भाई सात समंदर पार ही क्यों न हो उसे भरोसा रहता है कि बहन न भी आ पाएगी लेकिन उसके आशिश से भरी राखी उसकी कलाई में बंधने के लिए जरूर आएंगी. साथ ही भाई जब उसकी राखी को अपनी कलाई पर बांधता है तो उसे वहीं 1959 में आई फिल्म छोटी बहन का वो गाना याद आने लगता है जो आज भी भाई-बहन के रिश्ते की सबसे खूबसूरत मिसाल माना जाता है. करीब 67 साल बाद भी इस गाने की डिमांड आज भी वैसी की वैसी है. गाने का नाम है 'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना'.
लता मंगेशकर की आवाज से बना सदाबहार गीत
इस सदाबहार गीत को अपनी सुरीली आवाज से सजाया था स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने. वहीं इसके बोलों को जान दी थी शंकर-जयकिशन जिन्होंने भाई-बहन के रिश्ते में छिपे प्यार, विश्वास और अपनापन को बेहद खूबसूरती से अपनी लेखनी में बयां किया, जिसके कारण आज ये गाना रक्षाबंधन आते ही प्लेलिस्ट में छाने लगता है. यही वजह है कि हर रक्षाबंधन पर यह गाना एक बार फिर लोगों के जहन में लौट आता है और बचपन की अनमोल यादों को ताजा कर देता है.
यहां सुनिए और देखिए रक्षाबंधन का गाना भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना
67 साल पुराना पर आज भी जहन में नया जैसा
फिल्म छोटी बहन में यह गीत भाई - बहन के अटूट रिश्ते की भावनात्मक कहानी बनकर सामने आया था. लता मंगेशकर की दिल को छू लेने वाली आवाज और शंकर-जयकिशन के मधुर संगीत और गीतकार शैलेन्द्र के बोल ने इसे भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय राखी गीतों में शामिल कर दिया, यही वजह है कि 67 साल पुराना होने के बावजूद 'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना' आज भी हर पीढ़ी के दिल के करीब है.
क्या है फिल्म छोटी बहन की कहानी
1959 में आई छोटी बहन भाई-बहन के प्रेम और त्याग पर बनी एक फेमस हिंदी पारिवारिक फिल्म है, जिसमें बलराज साहनी (राजेंद्र), रहमान (शेखर) और नंदा (मीना) ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं. यह फिल्म भाई के अपनी बहन के प्रति असीम स्नेह और जीवन के संघर्षों की कहानी कहती है. फिल्म में माता-पिता के निधन के बाद बड़े भाई राजेंद्र और शेखर अपनी छोटी बहन मीना की देखरेख अकेले करते हैं.
वह कसम खाता है कि तक भाई-बहन का जीवन सेटल नहीं हो जाता, वह खुद शादी नहीं करेगा. शेखर को एक अमीर लड़की शोभा से प्यार हो जाता है, और इसी बीच मीना की शादी तय हो जाती है. मीना एक दुर्घटना का शिकार होकर अपनी आंखों की रोशनी खो बैठती है, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है. परिवार को आर्थिक और पारिवारिक गलतफहमियों जैसे कई संकटों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अंत में भाई-बहन के प्यार की जीत होती है.
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