बॉलीवुड में सिर्फ प्रेम पर ही नहीं बल्कि आम लोगों से जुड़ी जिंदगी पर भी गाने बन चुके हैं. 52 साल पहले हिंदी सिनेमा में एक ऐसा गाना आया था, जो हर जमाने के मजदूर से लेकर बड़ी-बड़ी नौकरी करने वालों से कनेक्ट होता है. इस गाने का नाम 'हाय हाय ये मजबूरी' है, जो फिल्म 'रोटी कपड़ा और मकान' का है. यह फिल्म साल 1974 में सिनेमाघरों में रिलीज होगी. यह गाना सिर्फ रोमांस नहीं, आम आदमी की मजबूरी का आईना है.
गाने में दिखता है कॉर्पोरेट कर्मचारियों का दर्द
जीनत अमान और मनोज कुमार पर पिक्चराइज्ड 'हाय हाय ये मजबूरी' गाना आज के कॉर्पोरेट कर्मचारियों से सीधे कनेक्ट करता है, जहां कम सैलरी, लंबी ड्यूटी और प्यार के बीच की दूरी रोज की सच्चाई बन गई है. वर्मा मलिक ने 52 साल पहले ही भविष्य की बात कह दी थी.'हाय हाय ये मजबूरी' लता मंगेशकर की आवाज में प्रेम और नौकरी के टकराव को खूबसूरती से पेश करते हैं.
लता मंगेशकर, संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और गीतकार वर्मा मलिक की टीम ने इसे अमर बना दिया. गाने में जीनत अमान अपने प्रेमी मनोज कुमार की कम तनख्वाह वाली नौकरी को कोसती है क्योंकि उसकी वजह से उनका लाखों का सावन हाथ से निकल रहा है. आज भी कई कॉर्पोरेट एम्प्लॉईज यही महसूस करते हैं, कम सैलरी, ओवरटाइम और रिश्ते की दूरी.
फिल्म का बजट और कलेक्शन
'रोटी कपड़ा और मकान' को मनोज कुमार ने ना सिर्फ लिखा बल्कि इस फिल्म के निर्माता-निर्देशक भी थे. यह फिल्म 18 अक्टूबर 1974 को रिलीज हुई. इसमें मनोज कुमार, जीनत अमान, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, मौसमी चटर्जी और प्रेमनाथ मुख्य भूमिका में थे. फिल्म बेरोजगारी, महंगाई और आम आदमी के संघर्ष पर आधारित थी.
'रोटी कपड़ा और मकान' का बजट करीब 1.30 करोड़ था और यह 1974 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. घरेलू बॉक्स ऑफिस पर करीब 10.40 करोड़ कमाई के साथ यह ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. फिल्मफेयर में 11 नॉमिनेशन मिले और तीन अवॉर्ड जीते.
'हाय हाय ये मजबूरी' गाना पहले मौसमी चटर्जी पर शूट होने वाला था, लेकिन उनकी प्रेग्नेंसी की वजह से जीनत अमान पर पिक्चराइज्ड किया गया. जीनत अमान की साड़ी वाली लुक और लता जी की आवाज ने इसे यादगार बना दिया. बिनका गीतमाला में भी यह गाना टॉप पर रहा.
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