कंगना रनौत पिछले कुछ दिनों से अपने एक बयान को लेकर चर्चा में थीं. कंगना ने यह कहकर विवाद शुरू कर दिया था कि कुछ युवा हिंदू महिलाएं (Gen Z) बिना किसी जिम्मेदारी के आजादी का दिखावा करती हैं. उन्होंने उन्हें 'जेनरेशन गटर' (गंदी सोच वाली पीढ़ी) कहा था. कंगना के इस बयान पर काफी हंगामा हुआ. इस पर कई लोगों के कड़े रिएक्शन आए. हाल में इस बारे में एक इवेंट के दौरान बाबा रामदेव से 'जेन जी' (Gen Z) के बारे में कंगना के इन कमेंट्स के बारे में पूछा गया. खबरों के मुताबिक उन्होंने इस बयान को 'बिगड़ी हुई सोच' का नतीजा बताया और उनकी राजनीतिक पार्टी से इस पर ध्यान देने को कहा.
कंगना ने क्या कहा?
कंगना ने अब इवेंट में बाबा रामदेव के कमेंट पर रिएक्शन दिया है. बुधवार (19 अगस्त) को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कंगना ने बाबा रामदेव पर तीखा तंज कसते हुए कहा, "बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में दिन में सपने न देखें. कोई भी सिर्फ अफवाहों और गपशप के आधार पर ही अंदाजा लगा सकता है. कम से कम मुझे कभी भी झूठे/फर्जी असरदार होने के दावों के लिए सुप्रीम कोर्ट से फटकार नहीं लगी."
उन्होंने आगे कहा, "इसलिए मुझे चरित्र का पाठ न पढ़ाएं. मेरा चरित्र आपसे कहीं बेहतर है, यहां कोई धोखाधड़ी नहीं पाई गई है." आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब बाबा रामदेव से एक पीढ़ी के बारे में एक्टर के बयानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने उनकी शिक्षा पर सवाल उठाना शुरू कर दिया. रामदेव ने कहा, 'उनका बचपन कैसा था? उनकी जवानी कैसी थी? उनकी पिछली उपलब्धियां कैसी थीं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता. युवाओं को 'जेनरेशन गटर' कहना खराब सोच की निशानी है.' कंगना ने कुछ Gen Z प्रदर्शनकारियों और महिलाओं को 'जेनरेशन गटर' कहा था और उन पर वेस्टर्न सोच अपनाने का आरोप लगाया था.
जब बाबा रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी माफी
कंगना ने बाबा रामदेव और सुप्रीम कोर्ट के बारे में जो बात कही, वह 2024 की है. भ्रामक विज्ञापनों के बारे में कोर्ट के पिछले आदेश का पालन न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण को तलब किया था. उनसे पूछा गया था कि बीमारियों को ठीक करने का दावा करने वाले और आधुनिक चिकित्सा को बदनाम करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाने वाले शीर्ष अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए.इसके बाद बाबा रामदेव ने भ्रामक विज्ञापनों के मामले में कोर्ट के आदेश का पालन न करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी.
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