मुंबई में आयोजित 26वें फिक्की फ्रेम्स में अभिनेता आयुष्मान खुराना ने भारतीय मीडिया और मनोरंजन जगत में तेजी से हो रहे बदलावों पर बात की. उन्होंने कहा कि आज कंटेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन असली चुनौती ऐसी कहानियां पेश करने की है, जो दर्शकों से जुड़ें, उनके भीतर जिज्ञासा पैदा करें और उन्हें बातचीत के लिए प्रेरित करें. उन्होंने ‘हनुमान अंश' और ‘ऑब्सेशन' की सफलता का उदाहरण देते हुए कहानी की अहमियत पर जोर दिया.
आयुष्मान ने कहा कि कहानियां आज सिर्फ फिल्मों या वेब सीरीज तक सीमित नहीं हैं. वे टेलीविजन, गेमिंग, संगीत और सोशल मीडिया सहित अलग-अलग माध्यमों और देश की अलग-अलग भाषाओं में सामने आ रही हैं. उनके मुताबिक, भारत के लिए मौजूदा मीडिया दौर की खासियत सिर्फ बड़ी मात्रा में कंटेंट तैयार करना नहीं, बल्कि उसके जरिए मूल्य पैदा करना है.
क्या बोले आयुष्मान खुराना
उन्होंने कहा, “कहानियां हर जगह हैं- फिल्मों, सीरीज, टीवी, गेमिंग, संगीत और सोशल मीडिया कंटेंट में. सभी भाषाओं में और भारत के हर कोने से कहानियां सामने आ रही हैं. लेकिन मेरे लिए भारत का मीडिया मोमेंट उस कंटेंट की मात्रा में नहीं है, जो हम बना रहे हैं, बल्कि उस मूल्य में है, जो हम उसके जरिए पैदा कर रहे हैं.”
आयुष्मान ने कहा कि अच्छी कहानियां लोगों को प्रेरित करने के साथ-साथ बातचीत शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का काम भी करती हैं. उनके अनुसार, एक बातचीत भी बदलाव की शुरुआत कर सकती है. उन्होंने अपने पिछले एक दशक के करियर का हवाला देते हुए कहा कि जिन फिल्मों का वह हिस्सा रहे हैं, उनके जरिए उन्होंने इस अनुभव को महसूस किया है. एक कलाकार के तौर पर यही उनके लिए सबसे खूबसूरत पहलू है.
अलग-अलग भाषाओं की कहानी
उन्होंने ‘हनुमान अंश' और ‘ऑब्सेशन' की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों अलग तरह की कहानियों की दुनिया से आते हैं, लेकिन दर्शकों की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि अगर कहानी में जिज्ञासा, भावनात्मक जुड़ाव और बातचीत पैदा करने की क्षमता हो, तो वह अपने दर्शकों तक पहुंच सकती है. आयुष्मान ने यह भी कहा कि भारतीय मनोरंजन जगत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है. देश के अलग-अलग हिस्सों और भाषाओं से निकल रही कहानियां अब पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से आगे जाकर दर्शकों तक पहुंच रही हैं.
उनके मुताबिक, एक कलाकार के लिए सबसे संतोषजनक बात सिर्फ तेजी से बढ़ते मनोरंजन उद्योग का हिस्सा बनना नहीं है, बल्कि ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना है, जो लोगों को प्रेरित करें, उनके बीच संवाद शुरू करें और किसी स्तर पर बदलाव की वजह बन सकें. फिक्की फ्रेम्स में आयुष्मान की यह बात ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय कहानियां अलग-अलग माध्यमों के जरिए देश से बाहर भी नए दर्शकों तक पहुंच रही हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं