हिंदी सिनेमा में साल 1966 में एक फिल्म आई थी. जिसका नाम था सूरज. फिल्म जुबली कुमार के नाम से मशहूर राजेंद्र कुमार के सुनहरी दौर की आखिरी ब्लॉकबस्टर हिट बताई जाती है. इस फिल्म के गाने बहुत ही कमाल थे और फिल्मफेयर अवॉर्ड के साथ ही, आज तक इन्हें भुलाया नहीं जा सका है. इसका एक गाना जिसे शारदा ने गाया था जो आज 60 साल भी उतना ही ताजा है, जितना उस समय हुआ करता था. शारदा का गाया ये गाना है 'तितली उड़ी, उड़ जो चली.' ये गाना सिर्फ हिट ही नहीं हुआ, बल्कि इस गाने हिंदी सिनेमा के अवॉर्ड सिस्टम को हमेशा के लिए बदल गया.
उन दिनों फिल्मफेयर में प्लेबैक सिंगिंग का सिर्फ एक अवॉर्ड होता था. मेल और फीमेल सिंगर की कोई कैटेगरी नहीं होती थी. 1966 में 'सूरज' फिल्म से दो गाने छा गए. एक था मोहम्मद रफी का 'बहारों फूल बरसाओ' और दूसरा शारदा था 'तितली उड़ी'. दोनों गानों को लगभग बराबर वोट मिले. लेकिन अवॉर्ड मोहम्मद रफी को मिला, लेकिन विवाद इतना बढ़ा कि अगले साल से फिल्मफेयर ने मेल और फीमेल प्लेबैक सिंगर के लिए अलग-अलग अवॉर्ड शुरू कर दिए. शारदा को स्पेशल बेस्ट न्यूकमर अवॉर्ड से नवाजा गया. सूरज फिल्म का निर्देशन टी. प्रकाशराव ने किया था.
लता-आशा के स्टारडम के बीच बनाई पहचान
शारदा का गाया सूरज फिल्म का ये गाना शंकर-जयकिशन की धुन पर बना था. इसके बोल शैलेंद्र ने लिखे थे. इसे वैजयन्तीमाला और मुमताज पर फिल्माया गया था. हल्की, चुलबुली और याद रहने वाली धुन ने तुरंत घर-घर में जगह बना ली. ये गाना रेडियो पर खूब बजता था और बच्चों के बीच खूब पॉपुलर हो गया था. शारदा उस दौर में लता मंगेशकर और आशा भोसले के सिंगिंग स्टारडम के बीच एक नई आवाज बनकर आई थीं और छा गई थीं.
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
खिले हैं गगन में तारों के जो फूल
वहीं मेरी मंज़िल कैसे जाऊँ भूल
जहाँ नहीं बंधन ना कोई दीवार
जाना है वहाँ मुझे बादलों के पार
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
फूल ने कहा तेरा जाना है बेकार
कौन है वहाँ जो करे तेरा इंतज़ार
बोली तितली दोनों पंख पसार
वहाँ पे मिलेगा मेरा राजकुमार
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
तितली ने पूरी जब कर ली उड़ान
नई दुनिया में हुई नई पहचान
मिला उसे सपनों का राजकुमार
तितली को मिल गया मनचाहा प्यार
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
शारदा का तूफानी आगाज, लेकिन आगे नहीं मिला साथ
शारदा राजन अयंगर का जन्म तमिलनाडु में हुआ था. राज कपूर ने उन्हें तेहरान में गाते सुना और मुंबई आने की सलाह दी. इसके बाद शंकर-जयकिशन ने उन्हें मौका दिया. 'तितली उड़ी' उनके करियर का सबसे बड़ा गाना साबित हुआ, हालांकि बाद में 1970 में फिल्म 'जहां प्यार मिले' के गाने 'बात जरा है आपस की' के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.
इतना शानदार आगाज होने के बावूजद शारदा को आगे चलकर कुछ खास मौके नहीं मिल सके. जून 2023 में 89 वर्ष की आयु में शारदा का निधन हो गया. बेशक आज वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके इस गाने की लोकप्रियता आज भी उतनी ही है, जितनी उस समय थी जब इस ने पूरे सिस्टम को हिला दिया था.
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