आमिर खान के भांजे और एक्टर इमरान खान ने शनिवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की तरफ से जारी लीव इंडिया नोटिस (LIN) के खिलाफ रिट याचिका दायर की. नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया था. अभिनेता ने अपनी याचिका में इस नोटिस को 'असंवैधानिक' बताया. यह नोटिस 14 अक्टूबर को आव्रजन और विदेशी अधिनियम (आईएफए), 2025 के कथित उल्लंघन के लिए जारी किया गया था. इमरान पर आरोप है कि उन्होंने 10 अक्टूबर को अगस्त क्रांति मैदान के पास मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर उल्लंघन किया था.
इमरान खान ने बॉम्बे कोर्ट में दायर की याचिका
44 वर्षीय अभिनेता ने एलआईएन को रद्द करने और इसके संचालन और कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, जब तक कि उनकी याचिका का निपटारा नहीं हो जाता. याचिका में अदालत से अंतरिम राहत की भी मांग की गई है ताकि अधिकारियों को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोका जा सके. इमरान खान ने दावा किया कि 'गैर-वास्तविक' एलआईएन 'मनमानी और सत्ता के घोर दुरुपयोग' के तहत जारी किया गया था. एमजेडएम लीगल के अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन, परवेज मेमन और चिराग नाइक सोमवार को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए विचार कर सकते हैं.
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बिना किसी कारण के जारी किया गया नोटिस
10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस द्वारा अभिनेता को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि अमेरिकी नागरिक और ओसीआई कार्डधारक ने कानून का उल्लंघन किया है. पुलिस द्वारा अग्रेषित एफआईआर के बाद, एफआरआरओ ने 14 अक्टूबर को एलआईएन जारी किया. याचिका में दावा किया गया है कि एलआईएन बिना किसी कारण के जारी किया गया है और इसमें कानून के किसी प्रावधान का कोई विशिष्ट उल्लंघन नहीं बताया गया है. याचिका में दावा किया गया है कि नोटिस में याचिकाकर्ता को केवल अमेरिकी नागरिक के रूप में वर्णित किया गया है और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत उनके ओसीआई पदनाम का उल्लेख नहीं किया गया है, जो एक वैधानिक दर्जा है और भारत में आजीवन निवास का अधिकार प्रदान करता है. इसलिए, इस मूलभूत तथ्य की अनदेखी 'विवेचना का अभाव' दर्शाती है.
याचिका में आगे दावा किया गया कि एलआईएन एक 'अंतिम आदेश' है जो बिना किसी पूर्व जांच, कारण बताओ नोटिस या जवाब देने का अवसर दिए जारी किया गया है और देश छोड़ने के लिए दिए गए 14 दिन सुनवाई का विकल्प नहीं हैं. उन्होंने आगे कहा कि सभाओं पर प्रतिबंध स्थानीय पुलिस के आदेश द्वारा लगाया गया था, न कि आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के तहत किसी आदेश द्वारा. साथ ही, यह स्थान केंद्र सरकार द्वारा उस अधिनियम के तहत संरक्षित या निषिद्ध स्थान घोषित नहीं था, इसलिए ओसीआई स्थिति की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ. याचिका में दावा किया गया कि अभिनेता ने बैरिकेड वाले क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास भी नहीं किया और पुलिस द्वारा वहां से जाने के लिए कहे जाने पर वह अपनी कार की ओर लौट रहे थे. पुलिस ने उन्हें तभी गिरफ्तार किया जब मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनसे बयान मांगा.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं