रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी स्टारर 'रामायणम्' ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी रफ्तार बनाए रखी है और सिनेमाघरों में रिलीज होने के दो दिनों के भीतर ही दुनिया भर में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. हालांकि, पहले दिन की कमाई के मुकाबले, दूसरे दिन फिल्म की घरेलू कमाई में गिरावट आई और इसने भारत में 48.05 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की. फिल्म को खूब पसंद किया जा रहा है. कास्ट की जमकर तारीफ हो रही है. इन्हीं में से एक हैं मुकेश तिवारी. वह 4000 करोड़ की रामायणम् में सम्मानित भारतीय संतों में से एक, अगस्त्य मुनि के रोल में हैं. फिल्म में उनके रोल को काफी पसंद किया जा रहा है.
सागर के रहने वाले हैं मुकेश
हालांकि, एक समय ऐसा भी था, जब मुकेश तिवारी महीने के केवल 3500 रुपये कमाते थे. 'दिव्य मराठी' के साथ बातचीत में मुकेश ने बॉलीवुड तक के अपने सफर के बारे में बताया था. मध्य प्रदेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे मुकेश कॉलेज जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते थे. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में पढ़ाई के दौरान उन्हें 600 रुपये के वजीफे (स्टाइपेंड) पर गुजारा करना पड़ता था, जिसमें से महीने के अंत में उनके पास केवल 45 रुपये ही बचते थे. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से स्नातक करने के बाद वे थिएटर से जुड़ गए. 'रंगमंडल' के साथ काम करते समय वे महीने के सिर्फ 3500 रुपये कमाते थे. उस समय वे वापस सागर (अपने गृहनगर) जाकर खेती करने के बारे में भी सोच रहे थे.उनके बॉलीवुड सफर की शुरुआत तब हुई, जब उन्होंने गिरीश कर्नाड के एक नाटक में अपने अभिनय से दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को प्रभावित किया. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में उनके शिक्षक रहे नसीरुद्दीन शाह ने उनके शुरुआती संघर्षों को देखा था, खासकर बोलने और संवाद करने में उन्हें जो मुश्किलें आती थीं. यह देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई कि कैसे वह युवा अभिनेता, जो कभी आत्मविश्वास के साथ बोलने के लिए संघर्ष करता था, अब बड़े थिएटर नाटकों में मुख्य भूमिकाएं निभा रहा है. उन्होंने मुकेश के इस बदलाव की सराहना की और उनके अभिनय की तारीफ भी की.
'चाइना गेट' से किया था डेब्यू
कुछ दिनों बाद, उन्हें राजकुमार संतोषी के ऑफिस से फिल्म 'चाइना गेट' में एक भूमिका के लिए फोन आया. शुरुआत में उन्हें लगा कि यह कोई मजाक है और कोई उन्हें बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा है. ठीक वैसे ही जैसे वे खुद अक्सर दूसरों के साथ मजाक किया करते थे. हालांकि, तीन दिन बाद नसीरुद्दीन शाह ने उनसे संपर्क किया और इस बात के लिए उन्हें डांटा कि उन्होंने इस मौके को गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने बताया कि राजकुमार संतोषी उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं और उन्होंने कुछ तस्वीरें मांगी हैं. इसके बाद, उन्होंने अपने नाटक 'अग्नि आणि बरखा' की कुछ तस्वीरें फिल्म निर्माता के ऑफिस में भेज दीं. इसके तुरंत बाद, उन्हें अगले ही दिन मुंबई के लिए फ्लाइट पकड़ने को कहा गया.हालांकि तब उनके पास मुंबई जाने के लिए फ्लाइट का टिकट खरीदने के पैसे नहीं थे. मुंबई जाने के लिए उन्हें अपने चौकीदार, सदबीर से पैसे उधार लेने पड़े थे. जब वे मुंबई पहुंचे, तो उनकी जेब में सिर्फ 85 रुपये थे और वे वड़ा पाव खाकर गुजारा करते थे. आगे चलकर उन्होंने एक्शन फिल्म 'चाइना गेट' से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने विलेन के रूप में अपना करियर बनाया. अपने पूरे करियर के दौरान, उन्होंने 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' (2002), 'आरक्षण' (2011), 'चक्रव्यूह' (2012) और 'गंगाजल' जैसी कई फिल्मों में विलेन या सख्त और रौबदार किरदार निभाए हैं.
हालांकि, 2006 की कॉमेडी फिल्म 'गोलमाल' ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया. इसमें 'वसूली भाई' के रूप में उनके अभिनय ने पूरे देश का दिल जीत लिया. 'डेली हंट' के अनुसार, तिवारी की नेटवर्थ लगभग 47 करोड़ रुपये (5 मिलियन डॉलर) है. पर्दे पर विलेन का किरदार निभाकर दर्शकों को प्रभावित करने वाले नितेश तिवारी असल जिंदगी में एक हीरो हैं. वे कई सालों से भोपाल, औरंगाबाद और मुंबई के एक-एक स्कूल में गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं. उन्होंने 'दिव्य मराठी' को बताया, "उन बच्चों को नहीं पता कि उनकी फीस मैं भरता हूं. मैंने स्कूल प्रशासन से भी यह बात न बताने के लिए कहा है. इनमें से दो लड़कियां आगे चलकर डॉक्टर बनेंगी."
बता दें कि 4,000 करोड़ रुपये की रामायणम् में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में और साई पल्लवी माता सीता के रूप में नजर आ रही हैं. इसके अलावा, 'केजीएफ' स्टार यश इसमें रावण की भूमिका निभा रहे हैं.
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