नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों काफी चर्चा में है. किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई करेगी. हनुमान अंश ने सिर्फ 24 दिनों में 800 फीसदी की मुनाफा हासिल किया है. फिल्म की हर कोई तारीफ कर रहा है. हनुमान अंश की शानदार सफलता के बीच फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने एनडीटीवी से खास बातचीत की और फिल्म की शानदार परफॉर्मेंस पर अपनी खुशी जाहिर की है. नीचे पढ़ें विशाल चतुर्वेदी की बातचीत के अंश:-
सवाल: विशाल, फिल्म की कामयाबी को आप किस तरह देख रहे हैं और अभी बिजनेस कहां तक पहुंचा है?
जवाब: प्रभु कृपा से फिल्म अच्छी चल रही है. पहले हम नंबर ऑफ टिकट्स और कितने करोड़ पर डे कर रही है, ये काउंट कर रहे थे. लेकिन अब मुझे लगता है कि फिल्म लोगों के हाथ में चली गई है और वो इसे जहां पहुंचाना चाह रहे हैं, वहां पहुंचा दे रहे हैं. मैंने अब कोई खास काउंट नहीं किया है, लेकिन कल का फिगर डबल डिजिट से ऊपर है. अब ये हमारे हाथ में रही नहीं है, इसलिए ट्रैक करना भी मैंने बंद कर दिया है. मैं अभी वृंदावन में हूं और आज महाराज जी की समाधि पर अपनी टीम के साथ समय व्यतीत किया.
सवाल: मैंने सुना है कि एक-दो दिन पहले फिल्म की बुकिंग ‘टॉक्सिक' से भी ज्यादा हो रही थी?
जवाब: जी! मैंने भी सोशल मीडिया पर कई स्क्रीनशॉट्स के माध्यम से सुना कि एक समय पर हमारी 4,000 टिकट्स की बुकिंग ‘टॉक्सिक' से ज्यादा चल रही थी. लेकिन ये ऊपर-नीचे होता रहता है. उनकी काफी बड़ी फिल्म है, तो मुझे लगता है कि हमें उनसे कॉम्पीट भी नहीं करना चाहिए.
सवाल: ट्रेड एनालिस्ट फिल्म के 150 करोड़ तक जाने की उम्मीद कर रहे हैं. आपकी क्या एक्सपेक्टेशन है?
जवाब: मुझे लगता है कि बात नंबर से ज्यादा लोगों के जन-जागरण और भावनाओं तक पहुंच गई है. लोग इसे जहां तक ले जाएंगे, मैं किसी नंबर या आंकड़े को टारगेट या लिमिट नहीं करना चाहता. दोनों चीजें मुझे लगता है कि लिमिटलेस हैं. महाराज जी की जहां बात आती है, वहां सब लिमिटलेस हो जाता है. इसलिए मैं इसे इस तरह से नहीं देखता. लोग 50, 100, 150 करोड़ की बात कर रहे हैं, मुझे सुनकर बहुत अच्छा लग रहा है. जहां भी जैसा प्रसाद रूप में मिलेगा, हम ग्रहण करेंगे.
सवाल: छोटी और कम बजट की फिल्मों को अक्सर थिएटर पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है. इस फिल्म की सफलता से एक फिल्ममेकर के तौर पर आपका आत्मविश्वास बढ़ा है?
जवाब: मुझे लगता है कि जब हमने इस बात का साहस किया था कि हम फिल्म को थिएटर में लेकर जाएंगे और हमारे पास जो ओटीटी ऑफर्स थे, उनकी तरफ न देखते हुए थिएटर पर फोकस किया, तो उसके पीछे हमारा मानना था कि ये फिल्म रामकथा है और सब लोगों तक पहुंचनी चाहिए. वैसा ही हुआ.
मेरा मानना है कि इस फिल्म के जरिए बहुत सारे नए और पुराने फिल्ममेकर्स को ये समझ आएगा कि अगर आप कंटेंट और भावनाओं पर फोकस करें और गिमिक्स पर फोकस न करें, तो आपकी फिल्म छोटी हो या बड़ी, उससे फर्क नहीं पड़ता. लोग अच्छा कंटेंट, अच्छी फिल्में और खास तौर पर पारिवारिक कहानियां देखने के लिए बहुत उत्सुक हैं.
ग्राउंड पर जाकर भी मुझे ये बहुत अच्छे से पता चल रहा है कि परिवार के साथ फिल्म देखने का जो आनंद है, वो लोगों को मिल रहा है. जब भावनाएं जुड़ती हैं तो परिवार के अंदर भी एक छोटा परिवर्तन आता है और लोग एक-दूसरे की भावनाओं को बेहतर समझते हैं.
कई दशकों तक सिनेमा परिवार को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का काम करता रहा, लेकिन पिछले कुछ दशकों में हम वो काम नहीं कर पाए. पारिवारिक तौर पर एक साथ फिल्म देखने का आनंद टूट गया और लोगों ने घर पर टेलीविजन और मोबाइल फोन पर फिल्में देखना शुरू कर दिया. मुझे लगता है कि ये परिवर्तन होना चाहिए था और मेरी तरफ से ये एक कदम था कि परिवार कैसे साथ आकर फिल्म देखे.
सवाल: ‘हनुमान अंश' नीम करोली बाबा पर आधारित है, जिनके दुनियाभर में लाखों भक्त हैं. क्या आपको लगता है कि उनके नाम और लोकप्रियता ने भी फिल्म की सफलता में बड़ी भूमिका निभाई?
जवाब: मुझे लगता है कि महाराज जी के नाम का बहुत ज्यादा प्रताप है. एक फिल्म और भी आई थी, जो बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई थी और हमसे दो महीने पहले आई थी. इसके अलावा दो और कंटेंट अनाउंस्ड हैं. महाराज जी के व्यक्तित्व को लेकर लोगों में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट है, तो उसका बहुत बड़ा रोल रहा है और इसमें कोई डाउट नहीं है.
‘हनुमान अंश' टाइटल का भी बहुत फर्क पड़ा है. ‘हनुमान' शब्द का भी बहुत फर्क पड़ा है. हमारी फिल्म में हनुमान चालीसा का एक पूरा सीन है, उसका भी बहुत ज्यादा असर हुआ है, क्योंकि हनुमान चालीसा ऐसी चीज है जिससे भारतवर्ष में हर आदमी रिलेट कर पाता है.
मुझे लगता है कि इन सारी चीजों का फिल्म को फायदा मिला है. खास तौर पर प्रेरणा के रूप में भी नीम करोली बाबा महाराज जी हैं और फिल्म के चलने में सबसे बड़ा श्रेय उन्हीं को जाता है. समाज के बीच उनका जितना नाम प्रचलित है और उनकी जो कहानियां प्रचलित हैं, उनका भी फिल्म को बहुत-बहुत फायदा मिला है.
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