जब इंसान प्यार में होता है तो वो कुछ भी कर सकता है. अपने प्यार को पाने की ताकत में इंसाना रंक से राजा भी बन सकता है. आज हम एक ऐसे ही आशिक की कहानी बताएंगे जो महज एक बस कंडक्टर था जिसने शायद ही कभी सोचा हो कि वो हिंदी सिनेमा का इतना बड़ा नाम बन जाएगा. 62 साल पहले एक गाना आया जिसको लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से अमर बना दिया. लेकिन ये गाना जिसने लिखा वो कोई गीतकार नहीं बल्कि एक बस कंडेक्टर था. जिसने आगे चलकर अपने करियर में एक से बढ़कर एक बेहतरीन गाने दिए. अपनी प्रेमिका के लिए लिखा वो खत जिसे वो कभी उसको दे नहीं पाए, उसको भी उन्होंने अपने गाने में पिरोकर ऐसा सजाया कि ये वो गाना सदाबहार बन गया. आइए जानते हैं इस गाने की अनसुनी कहानी.
प्रेम पत्र को गाना बनाकर किया रिलीज
अपने प्यार का इजहार करने के लिए प्रेमिका को लिखे गए इस लेटर से ऐसा गीत बना जो साल 1964 में आई फिल्म संगम का हिस्सा बना. गाने के बोल, संगीत और गायकों की आवाज ने इसे ऐसा पिरोया कि सालों बाद भी ये आशिकों की फेवरेट प्लेलिस्ट में शामिल रहता है. हम बात कर रहे हैं संगम फिल्म के गाने की जिसके बोल कुछ इस तरह हैं- 'ये मेरा प्रेम पत्र' है. ये गाना हर उस प्रेमी का फेवरेट बन गया जो अपने दिल का हाल बताना चाहता था. फिल्म में इस गाने को वैजयंती माला और राजेंद्र कुमार पर फिल्माया गया था. इसके बोल लिखे थे हसरत जयपुरी ने, इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था. जिसे लता और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से सजाया.
गाने के बोल-
मेहरबाँ लिखूँ, हसीना लिखूँ या दिलरुबा लिखूँ?
हैरान हूँ कि आपको इस ख़त में क्या लिखूँ
ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर के तुम नाराज़ ना होना
कि तुम मेरी ज़िंदगी हो, कि तुम मेरी बंदगी हो
ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर के तुम नाराज़ ना हो
नाकि तुम मेरी ज़िंदगी हो, कि तुम मेरी बंदगी हो
कौन से हसरत जयपुरी
हसरत जयपुरी ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक गाने दिए. लेकिन शुरुआत हुई उनके प्रेम पत्र के साथ, जो वो अपनी प्रेमिका को कभी दे नहीं पाए. हसरत जयपुरी, जयपुर में रहते थे. उनके घर के सामने राधा नाम की एक लड़की रहती थी, जिसको वो पसंद करते थे. लेकिन उस दौर में प्यार का इजहार करना बहुत बड़ी बात थी. तब लड़का-लड़की आपस में बात भी नहीं करते थे. लेकिन वो राधा को बस अपनी खिड़की से ही देख पाए, उनकी प्रेम कहानी आगे नहीं बढ़ी. जिसके बाद वो मुंबई आकर बस कंडक्टर बन गए.
एक दिन बस में बैठे हुए उनको राधा की याद आई, जिसके बाद उन्होंने राधा के लिए एक प्रेम पत्र लिखा. हालांकि, ये लेटर राधा को कभी नहीं मिला, लेकिन बॉलीवुड में प्रेमियों के लिए एक अमरगीत जरूर बन गया.
ऐसे मिला था फिल्मों मे काम
दरअसल हसरत जयपुरी को हमेशा से ही लिखने का शौक था, अपना काम पूरा कर के वो शाम को शायराना की महफिलों में परफॉर्म करने के लिए जाते थे, उनकी एक परफॉर्मेंस के दौरान उन पर पृथ्वीराज कपूर की नजर पड़ी. इसके बाद उन्होंने अपने बेटे राज कपूर को हसरत जयपुरी से मिलाया और उनसे फिल्म बरसात के गाने लिखवाए जो साल 1949 में रिलीज हुई. करियर की पहली फिल्म और इस फिल्म में उनके 7 के सातों गाने हिट हुए. बता दें कि हसरत जयपुरी के नाम से जाने गए हसरत का असल नाम इकबाल था, लेकिन जब वो इंडस्ट्री में आए तो उन्होंने अपना नाम हसरत रखा और जयपुर का होने के चलते आगे जयपुरी लगाया. हसरत जयपुरी ने अपने करियर में कई गाने लिखे, जिसमें से कई गानों में उनके और राधा के अधूरे प्रेम की झलक देखने को मिलती है.
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