एक दौर था जब फिल्मों में कश्मीर की खूबसूरती सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं होती थी, बल्कि खुद एक किरदार की तरह नजर आती थी. पहाड़, झीलें, शिकारे और हरे-भरे नजारे जब पर्दे पर आते थे तो दर्शकों को लगता था जैसे वे भी उस खूबसूरत वादी का हिस्सा बन गए हैं. 1964 में आई फिल्म ‘कश्मीर की कली' ने भी कश्मीर की इसी खूबसूरती को बेहद खास अंदाज में पर्दे पर उतारा. फिल्म का गाना ‘तारीफ करूं क्या उसकी' आज भी हिंदी सिनेमा के उन गानों में शामिल है, जिसे सुनते ही आंखों के सामने डल झील और शिकारे का खूबसूरत नजारा घूमने लगता है. इस गाने में शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर की जोड़ी ने रोमांस को कश्मीर की वादियों से जोड़ दिया था.
डल झील पर बना था यादगार गाने का जादू
‘तारीफ करूं क्या उसकी' को फिल्म ‘कश्मीर की कली' के लिए मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी. गाने का संगीत ओ.पी. नैयर ने तैयार किया था और इसके बोल एस.एच. बिहारी ने लिखे थे. ‘ये चांद सा रोशन चेहरा, जुल्फों का रंग सुनहरा' जैसे बोल सीधे शर्मिला टैगोर की खूबसूरती की तारीफ करते हैं. लेकिन इस गाने की खूबसूरती सिर्फ शब्दों और संगीत तक सीमित नहीं थी. इसकी असली खासियत इसका फिल्मांकन था. गाने को श्रीनगर की मशहूर डल झील के शांत पानी पर फिल्माया गया था.
शिकारे पर शम्मी कपूर का अंदाज आज भी यादगार
गाने में शम्मी कपूर शिकारे पर नजर आते हैं, जबकि शर्मिला टैगोर दूसरे शिकारे में दिखाई देती हैं. दोनों के बीच की यह दूरी ही गाने के रोमांटिक अंदाज को और खूबसूरत बना देती है. शम्मी कपूर का चुलबुला अंदाज, उनका झील पर मस्ती करते हुए नजर आना और सामने शर्मिला टैगोर की खूबसूरत अदाएं उस दौर के दर्शकों के लिए बिल्कुल नया अनुभव रहा होगा.
कश्मीर की खूबसूरती के साथ अमर हो गया गाना
‘कश्मीर की कली' शशि कपूर नहीं बल्कि शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर की रोमांटिक फिल्म थी, जिसका निर्देशन शक्ति सामंत ने किया था. फिल्म की कहानी में कश्मीर की खूबसूरत पृष्ठभूमि अहम हिस्सा थी और इसी वजह से इसके गानों में भी वहां के प्राकृतिक नजारों को खास जगह मिली. ‘तारीफ करूं क्या उसकी' ने डल झील, शिकारे और शम्मी कपूर के अंदाज को इस तरह जोड़ा कि दशकों बाद भी यह गाना कश्मीर की सिनेमाई पहचान से अलग नहीं किया जा सकता.
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मोहम्मद रफी की आवाज में यह गाना आज भी वही पुराना रोमांटिक एहसास देता है. खास बात यह है कि गाने के फिल्मांकन ने सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं दिखाई, बल्कि 1960 के दशक के कश्मीर की ऐसी तस्वीर भी पेश की, जिसे देखकर आज भी लोग ठहर जाते हैं. यही वजह है कि ‘तारीफ करूं क्या उसकी' सिर्फ एक पुराना फिल्मी गीत नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा में कश्मीर की खूबसूरती की याद बन चुका है. आपको बता दें कि इस गाने की शूटिंग के लिए फिल्म की पूरी टीम मुंबई से कश्मीर गई थी. मुंबई से कश्मीर (श्रीनगर) की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 2,050 से 2,290 किलोमीटर है, जबकि हवाई दूरी (Air Distance) लगभग 1,650 से 1,680 किलोमीटर है.
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