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सूरदास के इस पद को अनूप जलोटा ने दी ऐसी आवाज, आज भी कृष्ण भक्तों की पहली पसंद

जन्माष्टमी पर कृष्ण भक्ति के गीतों की धूम रहती है, लेकिन एक ऐसा पद है जो सदियों पुराना होने के बावजूद आज भी लोगों के दिलों में बसा है. इसकी खास वजह सूरदास के शब्द और अनूप जलोटा की मधुर आवाज है.

सूरदास के इस पद को अनूप जलोटा ने दी ऐसी आवाज, आज भी कृष्ण भक्तों की पहली पसंद
कान्हा की शरारतों वाला सदाबहार भजन! क्या आपने सुना है?
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जन्माष्टमी का त्योहार आते ही देशभर में भगवान कृष्ण की भक्ति का रंग गहरा हो जाता है. मंदिरों में सजावट से लेकर झांकियों तक, हर जगह कान्हा की बाल लीलाओं की झलक देखने को मिलती है. कहीं दही-हांडी की धूम होती है, तो कहीं रातभर भजन-कीर्तन का दौर चलता है. इस पूरे माहौल में संगीत की अपनी खास जगह है. कृष्ण भक्ति से जुड़े कई भजन ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही मन में बाल गोपाल की शरारतों की तस्वीर उभर आती है. इन्हीं में से एक पद को अनूप जलोटा ने अपनी आवाज देकर घर-घर तक पहुंचाया और आज भी जन्माष्टमी के मौके पर यह भजन खूब सुनाई देता है. वह पद है 'मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो.'

सूरदास के पद में दिखती है नटखट कान्हा की लीला

'मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो' भगवान कृष्ण के बाल रूप और उनकी नटखट अदाओं को बेहद खूबसूरती से पेश करता है. इस पद के रचयिता महान भक्त कवि सूरदास माने जाते हैं. पद में बाल कृष्ण अपनी मां यशोदा के सामने मासूमियत से सफाई देते नजर आते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया. कृष्ण की बाल लीलाओं में माखन चोरी की कथा बेहद लोकप्रिय है. कान्हा अपने दोस्तों के साथ मिलकर घरों से माखन चुराते और फिर पकड़े जाने पर भोलेपन से इनकार कर देते थे. यही शरारत इस पद को प्यारा बनाती है. सूरदास की रचनाओं की खासियत यह रही कि उन्होंने भगवान कृष्ण को सिर्फ आराध्य के रूप में नहीं, बल्कि एक नटखट बालक के रूप में भी पेश किया. इसलिए ही उनके पद आज भी भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.

अनूप जलोटा की आवाज ने बनाया सदाबहार

भजन सम्राट के नाम से मशहूर अनूप जलोटा ने इस पद को अपनी मधुर आवाज में गाकर इसे नई पहचान दी. उनकी गायकी में भक्ति के साथ-साथ कृष्ण की बचपन की शरारत भी महसूस होती है. 'मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो' सुनते ही ऐसा लगता है जैसे यशोदा के सामने खड़े नन्हे कान्हा अपनी सफाई दे रहे हों. यही भाव इस भजन को बाकी भजनों से अलग बनाता है.

जन्माष्टमी के मौके पर मंदिरों, धार्मिक आयोजनों और घरों में कृष्ण भक्ति के गीतों के बीच इस भजन की लोकप्रियता आज भी कायम है, खासकर बाल कृष्ण की झांकियों और पूजा के दौरान इसे सुनना भक्तों को बेहद पसंद आता है. सदियों पहले सूरदास ने जिस बाल कृष्ण की छवि को शब्दों में उतारा था, अनूप जलोटा की आवाज ने उसे संगीत के जरिए नई पीढ़ियों तक पहुंचा दिया. यही कारण है कि ‘मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो' आज भी जन्माष्टमी के सबसे पसंदीदा कृष्ण भजनों में शामिल है.

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