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77 साल पुराना वो गाना जब मोबाइल नहीं रंगून गए सैंया से करनी पड़ती थी लैंडलाइन टेलीफोन पर बात, शमशाद बेगम गाने के हर बोल में है इश्क के कई रंग

70 साल से ज्यादा पुरानी एक धुन आज भी लोगों के दिलों में बसी है. जब पत्नी से दूर होने पर पति ने बताया अपना दर्द, फोन पर ही किया प्यार का इजहार और बताया अपना हाल.

77 साल पुराना वो गाना जब मोबाइल नहीं रंगून गए सैंया से करनी पड़ती थी लैंडलाइन टेलीफोन पर बात, शमशाद बेगम गाने के हर बोल में है इश्क के कई रंग
जब पिया से दूर होने पर फोन पर बताया था दिल का हाल
नई दिल्ली:

कभी-कभी कोई पुरानी धुन अचानक कानों में पड़ती है और बरसों पुरानी यादें ताजा कर देती है. खास बात ये है कि ऐसी धुनों का जादू समय के साथ कम नहीं होता, बल्कि हर नई पीढ़ी उन्हें अपने अंदाज में सुनना पसंद करती है. यही वजह है कि पुराने हिंदी गानों के नए रीप्राइज और मॉडर्न वर्जन आज भी लोगों का ध्यान खींचते हैं. सुकून भरी आवाज, आसान बोल और दिल को छू लेने वाली धुन जब नए संगीत के साथ मिलती है, तो नतीजा काफी खूबसूरत होता है. ऐसा ही कुछ इस मशहूर पुराने गाने के साथ भी देखने को मिल रहा है.

1949 का गाना, जो आज भी है लोगों की पसंद

बात हो रही है ‘मेरे पिया गए रंगून' की, जो 1949 में आई फिल्म पतंगा का बेहद पॉपुलर गाना है. इसे शमशाद बेगम और चितलकर यानी सी. रामचंद्र ने गाया था. गाने का संगीत सी. रामचंद्र ने दिया था, जबकि इसके बोल राजेंद्र कृष्ण ने लिखे थे. अपने दौर में ये गाना खूब पसंद किया गया और आज भी पुराने हिंदी संगीत के चाहने वालों के बीच इसकी खास जगह है. इसकी चुलबुली धुन और दिलचस्प अंदाज इसे बाकी गानों से अलग बनाते हैं. यही वजह है कि इतने साल बाद भी संगीतकार और प्रॉड्यूसर्स इस धुन को नए अंदाज में पेश करने से पीछे नहीं हटते. इस गाने में निगार सुल्ताना के साथ कॉमेडियन गोपे ने अभिनय किया था. 

गाने में पती रंगून से अपनी पत्नी को फोन करता है, और बताता है कि उसको अपनी पत्नी की याद आ रही है. जिसके बाद पत्नी भी अपने दिल का हाल बयां करती है. इस गाने के बोल और म्यूजिक इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं. 

क्लब मिक्स से लेकर सुकून भरे रीप्राइज तक

समय के साथ ‘मेरे पिया गए रंगून' के कई मॉडर्न वर्जन सामने आए हैं. कहीं इसे क्लब बीट्स के साथ पेश किया गया, तो कहीं ड्रिल और ट्रैप म्यूजिक का तड़का लगाया गया. इन वर्जन में पुराने गाने की पहचान बरकरार रखते हुए इसे आज की म्यूजिक पसंद के हिसाब से नया रूप दिया गया है. लेकिन इन तेज तर्रार वर्जन के बीच इसका सुकून भरा मॉडर्न रीप्राइज खास तौर पर सुनने वालों को पसंद आ सकता है.

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इसमें पुराने सुरों की मिठास को ज्यादा शांत और आधुनिक अंदाज में महसूस किया जा सकता है. यानी अगर आपको पुराने गानों की नॉस्टैल्जिया पसंद है और साथ ही आज के दौर का सॉफ्ट म्यूजिक भी अच्छा लगता है, तो ये वर्जन आपके प्लेलिस्ट के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

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