हिंदी सिनेमा का 73 साल पुराना वो गाना जो साल 1953 की बिनाका गीतमाला में नंबर वन सॉन्ग रहा था. इस गाने में बॉलीवुड एक्ट्रेस बीना राय (Bina Rai) नजर आई थीं. इस दर्द भरे गाने को लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने आवाज दी थी. हम बात कर रहे हैं अनारकली (1953) फिल्म के गाने 'ये जिंदगी उसी की है' की. ये सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के उस दौर की पहचान है, जब संगीत, शायरी और अदाकारी मिलकर पर्दे पर ऐसी कहानी रचते थे, जिसे दर्शक दशकों तक नहीं भूल पाए. 'अनारकली' में बीना राय पर फिल्माया गया यह गीत लता मंगेशकर की आवाज में अमर हो गया.
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फिर पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की बात हो और लता मंगेशकर का नाम न आए, ऐसा भला कैसे हो सकता है. उनकी आवाज में दर्द था, मोहब्बत थी और जुदाई का ऐसा एहसास था, जो सीधे दिल तक पहुंचता था. ऐसा ही गीत है ‘ये जिंदगी उसी की है', जिसे आज भी सुनने वाले इसकी धुन और बोल में खो जाते हैं. इस गीत की खासियत सिर्फ इसकी मधुर धुन नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी प्रेम कहानी भी है. एक ऐसी मोहब्बत, जिसमें चाहत तो है, लेकिन उसे पाने की राह आसान नहीं. यही वजह है कि इतने साल बाद भी यह गीत पुराने संगीत के चाहने वालों के बीच अपनी खास जगह बनाए हुए है.
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बिनाका गीतमाला और 1953 के गीतों का दौर
रेडियो सीलोन के लोकप्रिय कार्यक्रम 'बिनाका गीतमाला' ने हिंदी फिल्मी संगीत को घर-घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. अमीन सयानी की दिलकश आवाज में प्रसारित होने वाला यह कार्यक्रम श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय था. 1952 में शुरू हुआ यह साप्ताहिक कार्यक्रम कई दशकों तक फिल्मी गीतों की लोकप्रियता का एक महत्वपूर्ण मंच बना रहा. यह बिनाका गीतमाला के इतिहास का सबसे पहला 'सरताज गीत' बना था.
बीना राय बनी थीं अनारकली, बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तो़ड़ कलेक्शन
1953 में रिलीज हुई फिल्म अनारकली का निर्देशन नंदलाल जसवंतलाल ने किया था और इसे फिल्मिस्तान के बैनर तले बनाया गया था. फिल्म में बीना राय ने अनारकली, प्रदीप कुमार ने शहजादा सलीम और मुबारक ने अकबर की भूमिका निभाई थी. नादिरा और कुलदीप कौर भी अहम भूमिकाओं में थीं. 'अनारकली' 1953 की बड़ी व्यावसायिक सफलताओं में शामिल थी और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में गिनी जाती है. विकिपीडिया के मुताबिक फिल्म ने 2.35 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था.
सी. रामचंद्र का संगीत और लता मंगेशकर की आवाज
'ये जिंदगी उसी की है, जो किसी का हो गया, प्यार ही में खो गया' गीत के बोल राजेंद्र कृष्ण ने लिखे और संगीत सी. रामचंद्र ने तैयार किया था. लता मंगेशकर की आवाज ने इस गीत को ऐसी भावनात्मक गहराई दी कि यह फिल्म की कहानी से निकलकर श्रोताओं की निजी यादों का हिस्सा बन गया. इस गीत का राग भीमपलासी है. फिल्म में ये गाना दो बार आता है, एक बार खुशी में और दूसरी बार गम में.
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बिनाका गीतमाला की 1953 की सालाना लिस्ट में 'ये जिंदगी उसी की है' को पहला स्थान दिया गया था. इस लिहाज से यह गीत हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में खास मुकाम रखता है.
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