पुराने हिंदी गानों का अपना अलग ही जादू होता है. कुछ गाने ऐसे बन जाते हैं जो वक्त के साथ पुराने जरूर हो जाते हैं, लेकिन लोगों के दिल से कभी नहीं उतरते. आज भी जैसे ही उनकी धुन बजती है लोग मुस्कुराते हुए उन्हें गुनगुनाने लगते हैं. 72 साल पहले आया ऐसा ही एक गाना आज भी उतना ही फ्रेश लगता है. इसके चुलबुले बोल, मस्ती भरा अंदाज और दमदार आवाज ने इसे हर दौर का पसंदीदा बना दिया. यही वजह है कि सालों बाद भी इसका जिक्र होते ही पुराने दौर की यादें ताजा हो जाती हैं. जिस गाने की बात हो रही है वो है 'कभी आर कभी पार लगा तीर-ए-नजर'.
शमशाद बेगम ने इसे इतनी मस्ती और शरारत भरे अंदाज में गाया कि ये देखते ही देखते सुपरहिट बन गया. इस गाने के कई रीमिक्स भी बने, लेकिन लोगों का प्यार आज भी इसके ओरिजिनल वर्जन के लिए ही सबसे ज्यादा है. यही वजह है कि नई पीढ़ी भी इसे बड़े मजे से सुनती है.
गुरु दत्त की फिल्म से मिली खास पहचान
ये गाना 1954 में रिलीज हुई गुरु दत्त की सुपरहिट फिल्म आर-पार का हिस्सा था. इसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे और संगीत ओ.पी. नैयर ने तैयार किया था. फिल्म में ये गाना एक्ट्रेस कुमकुम पर फिल्माया गया था. आसान बोल और अलग अंदाज की वजह से ये गाना आज भी लोगों की जुबां पर चढ़ा हुआ है.
शमशाद बेगम के करियर का यादगार गाना
ये गाना शमशाद बेगम के करियर के सबसे बड़े हिट गानों में गिना जाता है. ओ.पी. नैयर के लिए भी ये शुरुआती बड़े सुपरहिट गानों में शामिल रहा. फिल्म के एक सीन में एक छोटा बच्चा भी नजर आता है, जो आगे चलकर शोले में 'सूरमा भोपाली' का यादगार किरदार निभाने वाले जगदीप थे. शायद यही वजह है कि ये गाना आज भी सिर्फ सुना नहीं जाता, बल्कि हर बार वही पुरानी मुस्कान भी साथ ले आता है.
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