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60 साल पुराना वो गाना, प्रेमिका के आने पर प्रेमी ने फूलों से कर दी स्वागत की फरियाद, रफी के शब्दों की गर्माहट ने घोली मिठास, गीत बना यादगार

छह दशक पहले एक प्रेमी ने अपनी महबूबा के आने पर बहारों को फूल बरसाने के लिए पुकारा था. मोहम्मद रफी की दिलकश आवाज में सजा यह रोमांटिक नगमा वक्त के साथ पुराना जरूर हुआ, लेकिन इसकी मिठास आज भी बरकरार है.

60 साल पुराना वो गाना, प्रेमिका के आने पर प्रेमी ने फूलों से कर दी स्वागत की फरियाद, रफी के शब्दों की गर्माहट ने घोली मिठास, गीत बना यादगार
60 साल पुराना गाना बहारो फूल बरसाओ आज भी सबकी पहली पसंद

हिंदी सिनेमा के कुछ गाने ऐसे हैं, जो वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर दौर में उतने ही खूबसूरत लगते हैं. 1966 में आई फिल्म ‘सूरज' का ‘बहारों फूल बरसाओ, मेरा महबूब आया है' भी ऐसा ही एक गीत है. मोहम्मद रफी की दिलकश आवाज में सजा यह गाना आज भी प्रेम और स्वागत की खूबसूरत मिसाल माना जाता है. हसरत जयपुरी के रोमांटिक बोल और शंकर-जयकिशन के मधुर संगीत ने गीत को ऐसी मिठास दी, जो दशकों बाद भी बरकरार है. पर्दे पर राजेंद्र कुमार और वैजयंतीमाला की जोड़ी ने गीत की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से जीवंत किया था.

रफी की आवाज ने प्रेम के एहसास को बना दिया खास

‘बहारों फूल बरसाओ' को मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज दी थी. गीत के बोल मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी ने लिखे थे और संगीत की जिम्मेदारी शंकर-जयकिशन की थी. गाने की धुन में शास्त्रीय संगीत का असर सुनाई देता है और इसे राग शिवरंजनी पर आधारित बताया जाता है. यही वजह है कि गीत में रोमांस के साथ एक अलग तरह की भावुकता भी महसूस होती है.

इस गाने की खूबसूरती सिर्फ इसके बोल या धुन में नहीं, बल्कि उस कल्पना में भी है, जिसमें प्रेमिका के आने की खुशी में पूरा माहौल ही जश्न में बदल जाता है. प्रेमी बहारों से फूल बरसाने की गुजारिश करता है, जैसे उसकी महबूबा का स्वागत सिर्फ वह नहीं, बल्कि पूरी प्रकृति कर रही हो. रफी की आवाज ने इस एहसास को इतनी गर्मजोशी से पेश किया कि गीत सुनते ही रोमांटिक माहौल बन जाता है.

राजेंद्र कुमार और वैजयंतीमाला की जोड़ी ने जीता दिल

फिल्म ‘सूरज' में यह गीत राजेंद्र कुमार और वैजयंतीमाला पर फिल्माया गया था. राजेंद्र कुमार ने फिल्म में सूरज सिंह का किरदार निभाया था, जबकि वैजयंतीमाला राजकुमारी अनुराधा सिंह के रूप में नजर आई थीं. दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था और इस गाने में उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने इसकी खूबसूरती और बढ़ा दी.

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फिल्म का निर्देशन टी. प्रकाश राव ने किया था. इसमें अजीत, मुमताज, जॉनी वॉकर और ललिता पवार जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे. राजसी माहौल, रोमांस और शानदार संगीत ने ‘सूरज' को अपने दौर की चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया था.

बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने किया शानदार प्रदर्शन

‘सूरज' की लोकप्रियता सिर्फ इसके गानों तक सीमित नहीं रही. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन किया था. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने करीब 5 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया और 1966 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में दूसरे स्थान पर रही. इसे बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट फिल्मों में गिना गया.

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हालांकि, दशकों बाद भी अगर ‘सूरज' का कोई गीत सबसे ज्यादा याद किया जाता है, तो वह ‘बहारों फूल बरसाओ, मेरा महबूब आया है' ही है. मोहम्मद रफी की आवाज, हसरत जयपुरी के शब्द और शंकर-जयकिशन की धुन ने मिलकर इसे ऐसा सदाबहार गीत बना दिया, जो आज भी प्यार के इजहार और खास मौकों पर अपनी जगह बनाए हुए है.

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