70 और 80 के दशक में हिंदी फिल्मों में मेलों का बहुत योगदान होता है. चाहे लव स्टोरी की शुरुआत हो, किसी मर्डर या किडनैपिंग का सीन, डाकुओं का एंट्री सीन या ऐसा ही कुछ फिल्मों में मेलों और नाच गाने को एक ट्रांजिशन के तौर पर इस्तेमाल कर लिया जाता था. आज हम आपको ऐसे ही एक गाने के बारे में बताने जा रहे हैं. ये गाना साल 1981 में आई चर्चित फिल्म 'बरसात की एक रात' का है.
बरसात की एक रात में अमिताभ बच्चन और अमजद खान लीड रोल में थे. इस फिल्म में भी दुर्गा पूजा का एक पंडाल लगा. सीन वही मेले वाला लेकिन लव स्टोरी या किसी मर्डर किडनैपिंग की साजिश नहीं हुई बल्कि हीरो अमिताभ बच्चन, विलेन बने अमजद खान को बुरी तरह चिढ़ाते और उनका मजाक उड़ाते नजर आए. इस गाने का नाम था 'कालीराम का ढोल'.
'कालीराम का ढोल' नाम से आया ये गाना किशोर कुमार ने गाया था. इस गाने के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे और इनके तो क्या ही कहने. गाने में कहते हैं 'कौआ हंस की चाल चला लंगड़ाकर घोड़ा दौड़ा, कौआ हंस की चाल चला लंगड़ाकर घोड़ा दौड़ा, एक गधे ने कोशिश की वो भी बन जाए घोड़ा.' इन बोलों को और मजेदार बनाते हैं अमिताभ बच्चन और अमजद खान के एक्सप्रेशन. एक तरफ अमिताभ बच्चन मस्ती में डांस करते दिख रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अमजद खान गुस्से से तमतमाए नजर आ रहे हैं.
गाना सुनने के लिए यहां क्लिक करें
'बरसात की एक रात' (1981) शक्ति सामंत के डायरेक्शन में बनी एक पॉपुलर हिंदी एक्शन-थ्रिलर फिल्म है. इसमें अमिताभ बच्चन (इंस्पेक्टर अभिजीत) और राखी गुलजार (रजनी) लीड रोल में हैं. इसकी कहानी एक ईमानदार पुलिस अधिकारी और एक कुख्यात अपराधी के बीच के संघर्ष पर आधारित है. ये फिल्म 1981 के उस वक्त की सबसे पॉपुलर फिल्मों में से एक हैं. विकिपीडिया पर दी गई जानकारी के मुताबिक एक करोड़ 20 लाख रुपये में बनी इस फिल्म ने 3.85 करोड़ रुपये की कमाई की थी.
यह भी पढ़ें: रीना रॉय का 50 साल पुराना गाना, सैयां हो गया था हरजाई, तेवर दिखाते हुए शिकायत कर रही थी सजनी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं