प्यार अगर सच्चा हो, तो उम्र सिर्फ एक नंबर बनकर रह जाती है. बॉलीवुड के एक पुराने गाने में इसी खूबसूरत एहसास को बड़े ही मजेदार अंदाज में पेश किया गया है. उम्र के फासले पर यूं तो कई गाने बन गए हैं, लेकिन 55 साल पहले बॉलीवुड में एक ऐसा गाना आया था, जिसे प्यार के इजहार को बिल्कुल अलग तरीके से दिखाया था.इस गाने का नाम 'जब हम होंगे साठ साल के' है. यह गाना 1971 में आई फिल्म कल आज और कल का है.
बेबो-लोलो के मम्मी-पापा का गाना
'जब हम होंगे साठ साल के' को किशोर कुमार और आशा भोसले की मधुर-मस्ती भरी आवाज में गाया है. शंकर-जयकिशन के सुर और शैली शैलेंद्र के बोल ने इसे कालजयी बना दिया. स्क्रीन पर बेबो-लोलो यानी करीना कपूर और करिश्मा कपूर के मम्मी-पापा रणधीर कपूर और बबीता की अदाकारी ने इसे और प्यारा कर दिया. यह गाना आज भी याद दिलाता है कि सच्चा प्यार उम्र बढ़ने से नहीं डरता.
'हम जब होंगे साठ साल के' की सबसे खास बात इसका मजेदार ख्याल है. गाने में प्रेमी अपनी प्रेमिका से भविष्य की कल्पना करते हुए पूछता है कि जब वह 60 साल का हो जाएगा और उसकी साथी 55 साल की होगी, तब भी क्या वह उससे उतना ही प्यार करेगी?
कपूर परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ आईं नजर
फिल्म कल आज और कल रणधीर कपूर की डायरेक्टोरियल डेब्यू थी. इसमें कपूर परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ नजर आईं. पृथ्वीराज कपूर दादा के रूप में, राज कपूर पिता के रूप में और रणधीर बेटे के रूप में. बबीता ने मोनिका का किरदार निभाया. यह पृथ्वीराज कपूर की आखिरी फिल्म साबित हुई. शंकर-जयकिशन का आरके फिल्म्स के साथ यह अंतिम संगीत सहयोग था.
पृथ्वीराज कपूर ने लगभग डेथबेड से डबिंग की थी. गाने में किशोर की हल्की खांसी और आशा की हंसी वाली अदा ने इसे और जीवंत बना दिया. आज भी यह गाना शादियों और परिवारों में बजाया जाता है, क्योंकि यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि उम्र से पार प्यार का सुंदर वादा है.
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