हिंदी सिनेमा के क्लासिक नगीनों का जिक्र हो तो शोले एक ऐसा नाम है जिसके बिना हर बात और हर चर्चा अधूरी होगी. इस फिल्म की स्टोरी लाइन, एक एक किरदार, एक एक गाना यहां तक कि डायलॉग तक पब्लिक के दिमाग में बसा हुआ है. कितने आदमी थे...तुम्हारा नाम क्या है बसंती...हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं...ये हाथ हमको देदे ठाकुर...ये शोले के उन डायलॉग में से शामिल हैं जो कि हर जनरेशन के बीच पॉपुलर रहें. कुछ लोगों ने इन्हें फिल्म देखकर जाना तो कुछ मीम्स में देखकर जय, वीरू, ठाकुर और गब्बर को पहचाने.
शोले फिल्म की सक्सेस में इसके गानों का भी बड़ा हाथ है कमाल देखिए कि इस फिल्म में 6 गाने थे और सभी के सभी सुपर-डुपर हिट रहे. कुछ तो आज तक भी खूब सुने जाते हैं. फ्रेंडशिप डे के मौके पर 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' याद आता है. होली के त्योहार पर 'होली के दिन दिल मिल जाते हैं' खूब बजाया जाता है और 'महबूबा महबूबा' तो आज भी क्लब और पार्टियों में पॉपुलर है.
1- अब जरा एक एक कर फिल्म के गानों को पकड़ें तो सबसे पहले बात करते हैं 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' की. इस गाने को किशोर कुमार और मन्ना डे ने गाया था.
2- 'कोई हसीना जब रूठ जाती है' वही गाना जो वीरू ने बसंती का दिल जीतने के लिए गाया था. इस गाने को असल में किशोर कुमार ने गाया था.
3- 'होली के दिन दिल मिल जाते हैं' गाना लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया था.
4- 'जब तक है जां जाने जहां' ये गाना आता है जब गब्बर वीरू को पकड़ लेता है और बसंती से उसे बचाने के लिए नाचने को कहता है. ये गाना लता मंगेशकर ने गाया था.
5- 'महबूबा महबूबा' डाकुओं की पार्टी में फिल्माए गए इस गाने को आर डी बरमन ने गाया था.
6- 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' इस गाने का सैड वर्जन भी था जब अमिताभ के किरदार जय की मौत हो जाती है. वीरू का दर्द बयां करता ये गाना किशोक कुमार ने गाया था.
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शोले बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक स्लो ओपनर रही लेकिन धीरे धीरे इस फिल्म ने खूब रफ्तार पकड़ी. विकिपीडिया पर दी गई जानकारी के मुताबिक 3.5 करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म ने करीब 35 करोड़ की कमाई थी. इस फिल्म के नाम एक और रिकॉर्ड ये दर्ज है कि ये एक 50 दिन तक थियेटर्स में रही थी.
शो की शानदार कास्ट
रमेश सिप्पी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमजद खान, असरानी, जया बच्चन, हेमा मालिनी, एके हंगल लीड रोल में थे. फिल्म की कहानी एक पुलिस इंस्पेक्टर के बदले पर आधारित है जो कि एक डाकू से बदला लेने के लिए जेल से भागे दो बदमाशों की मदद लेता है. ठाकुर के हाथ नहीं हैं इसलिए वो खुद बंदूक नहीं उठा सकता लेकिन जय और वीरू को वो बखूबी इस्तेमाल करता है. ये दोनों भी गांव वालों से घुलने मिलने के बाद गब्बर की मौत को अपना मिशन बना लेते हैं.
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