भारतीय सिनेमा और संगीत ने देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना से जुड़े कई यादगार गीत दिए हैं. लेकिन कुछ गीत ऐसे होते हैं जो किसी फिल्म का हिस्सा न होकर भी लोगों की यादों में हमेशा के लिए बस जाते हैं. ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा' भी ऐसा ही एक गीत है. अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और क्षेत्रों को एक धुन में पिरोने वाला यह गीत आज भी लोगों को उतना ही खास लगता है. इसे पहली बार 15 अगस्त 1988 को लाल किले पर ध्वजारोहण समारोह के बाद दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था. इसके बाद यह गीत धीरे-धीरे राष्ट्रीय एकता की पहचान बन गया.
1988 को पहली बार दूरदर्शन पर गूंजा था गीत
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा' को देश की विविधता में एकता का संदेश देने के मकसद से तैयार किया गया था. 15 अगस्त 1988 को स्वतंत्रता दिवस समारोह के प्रसारण के बाद जब इसे दूरदर्शन पर दिखाया गया, तब यह लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया. उस समय दूरदर्शन ही देश का सबसे बड़ा टेलीविजन माध्यम था और इसके जरिए यह गीत घर-घर तक पहुंचा. गीत की खासियत यह थी कि इसमें भारत की अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को जगह दी गई, लेकिन संदेश एक ही था- विविधताओं के बावजूद पूरा देश एक है. यही वजह रही कि यह गीत किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा.
अमिताभ बच्चन से कमल हासन तक
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा' का वीडियो अपने समय के कई लोकप्रिय चेहरों को एक साथ लेकर आया था. इसमें अमिताभ बच्चन, कमल हासन, जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, शर्मिला टैगोर, हेमा मालिनी, मीनाक्षी शेषाद्रि, सायरा बानो, रेवती, वहीदा रहमान और शबाना आजमी समेत फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां दिखाई दी थीं. इसमें सिर्फ कलाकार ही नहीं, बल्कि खेल और कला जगत की हस्तियों को भी शामिल किया गया. क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, बैडमिंटन और बास्केटबॉल से जुड़े खिलाड़ियों की मौजूदगी ने वीडियो को और व्यापक रूप दिया. इस तरह गीत ने मनोरंजन की दुनिया से आगे बढ़कर भारत की अलग-अलग प्रतिभाओं को एक साथ दिखाया.
18 शब्दों के जरिए कई भाषाओं में दिया एक संदेश
इस गीत का कॉन्सेप्ट भी इसे बाकी देशभक्ति गीतों से अलग बनाता है. ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा' में अलग-अलग भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल किया गया और सभी के जरिए एकता का संदेश दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गीत को करीब 14 भारतीय भाषाओं में प्रस्तुत किया गया था और इसकी संरचना करीब 18 शब्दों के इर्द-गिर्द बुनी गई थी. इससे वीडियो में भारत के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति, भाषा और जीवन की झलक देखने को मिली. संगीत से जुड़े दिग्गज पंडित भीमसेन जोशी की मौजूदगी ने इसे खास पहचान दी.
2010 में आया नया वर्जन
साल 2010 में ‘फिर मिले सुर मेरा तुम्हारा' नाम से इस गीत को नए कलाकारों के साथ दोबारा पेश किया गया. कैलाश सुरेंद्रनाथ के निर्देशन में बने इस संस्करण में श्रेया घोषाल, शान समेत कई नए दौर के कलाकार नजर आए. हालांकि नए दौर के कलाकारों के साथ गीत को फिर से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन 1988 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए मूल गीत की अपनी अलग जगह रही. उस समय जब देश में टेलीविजन के सीमित विकल्प थे, करोड़ों लोगों तक एक साथ पहुंचा यह गीत लोगों की यादों का हिस्सा बन गया.
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