हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही आंखों के सामने रंग-बिरंगी पोशाकें, महल, गुफाएं और पुराने जमाने की जादुई दुनिया घूमने लगती है. ऐसा ही एक गाना है, जो 1980 में आई फिल्म 'अली बाबा और 40 चोर' का हिस्सा था. इस गाने में जीनत अमान का अंदाज, आशा भोसले की आवाज और आर. डी. बर्मन का संगीत मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जो आज भी लोगों को याद है. फिल्म में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी भी मुख्य भूमिकाओं में थे. इस फिल्म का फेमस गाना सिर्फ एक डांस नंबर नहीं था, बल्कि उस दौर के भव्य सिनेमा की एक झलक भी था. इसकी धुन और फिल्मांकन ने इसे लंबे समय तक यादगार बनाए रखा.
कौन सा था गाना
हम बात कर रहे हैं फिल्म अली बाबा 40 चोर का गाने खतूबा की. इस गाने को एक गुफा के अंदर शूट किया गया था. जिसमें जीनत अमान 40 चोरों के साथ गुफा के अंदर डांस करती हैं. उस वक्त जब ये फिल्म रिलीज हुई तो ये गाना काफी फेमस हो गया था. जीनत का डांस और गाने का सार एकदम परफेक्ट फिट होता है. इस गाने को गाने के लिए आशा भोसले ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने इस गाने को गाने और इसके उच्चारण को सही रूप देने के लिए उस दौर के कुछ असल मिडिल-ईस्टर्न (अरबी) गानों को सुना था ताकि वह उस फील को पूरी तरह से पकड़ सकें.
अरेबियन कहानी पर बनी थी फिल्म
'अली बाबा और 40 चोर' एक भारत-सोवियत संयुक्त फिल्म थी, जिसे उमेश मेहरा और लतीफ फैजीव ने निर्देशित किया था. इसकी कहानी मशहूर 'अरेबियन नाइट्स' की दास्तान अली बाबा और चालीस चोरों से प्रेरित थी. फिल्म में धर्मेंद्र ने अली बाबा और हेमा मालिनी ने मरजीना का किरदार निभाया था, जबकि जीनत अमान फातिमा के रूप में नजर आई थीं. फिल्म की कहानी में रोमांच, जादू और खजाने की दुनिया थी, इसलिए गानों में भी उसी तरह का भव्य माहौल रखा गया.
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गुफा में जीनत अमान का यादगार डांस
'खतूबा' में जीनत अमान का डांस फिल्म का खास आकर्षण था. गाने के फिल्मांकन में अरेबियन अंदाज की पोशाकें, गुफा जैसा सेट और चालीस चोरों की दुनिया दिखाई देती है. जीनत अमान का ग्लैमरस अंदाज इस पूरे दृश्य को और खास बना देता है. गाने के बोलों में एक ऐसी लड़की की बात है, जिसके कई दीवाने हैं और वह सोच रही है कि आखिर किसे अपना महबूब बनाए. यही वजह है कि गाने में रोमांस के साथ शरारत और नटखटपन भी नजर आता है.
आशा भोसले और पंचम दा की जोड़ी
'खतूबा' को आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी. इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे और संगीत आर. डी. बर्मन ने तैयार किया था. गाने की सबसे खास बात इसकी धुन है, जिसमें अरेबियन माहौल की झलक मिलती है. 'खतूबा खतूबा' की दोहराई जाने वाली आवाज गाने को अलग पहचान देती है. यह गाना 1980 के दशक के उन यादगार फिल्मी गीतों में शामिल है, जिन्हें आज भी पुराने गानों के शौकीन सुनना पसंद करते हैं.
आज भी क्यों याद है 'खतूबा'?
'खतूबा' की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह इसका अनोखा फिल्मांकन है. उस दौर में बड़े सेट, अलग तरह की कहानियां और भव्य डांस सीक्वेंस दर्शकों को आकर्षित करते थे. जीनत अमान का अंदाज, आशा भोसले की आवाज और पंचम दा की धुन ने इस गाने को एक अलग पहचान दी. फिल्म की कहानी भले ही अरेबियन दुनिया से जुड़ी थी, लेकिन गाने का अंदाज पूरी तरह हिंदी फिल्मी रंग में था. यही मेल 'खतूबा' को आज भी पुराने सिनेमा के यादगार गानों में बनाए रखता है.
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