हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं, जो अपने अलग अंदाज के लिए जाने जाते हैं. आज हम 33 साल पुराने एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जिसमें उसकी धुन और बोलों ने उसको अलग बना दिया. 90 के दशक के इस गाने को सुनते ही कबूतर और अटरिया की याद आ जाती है. एक दौर था जब कबूतर के जरिए लोग अपने दिल की बात दूसरे तक पहुंचाते थे. लेकिन इस गाने में कबूतर को ही प्यार का प्रतीक मान लिया गया. यहां तक की उसकी गुटुर-गुटुर को भी गाने में शामिल किया गया. इस गाने के बोल, इसका संगीत और इसको गाने का अंदाज इसे बाकी रोमांटिक गानों से अलग बनाता है. साल 1993 में रिलीज हुआ ये गाना आज भी पुराने रोमाटिंक चुलबुले अंदाज वाले गानों में शामिल रहता है.
बप्पी लाहिड़ी के संगीत और चार गायकों ने बनाया यादगार
साल 1993 में आई फिल्म दलाल का निर्देशन पार्थो घोष ने किया था और इसके प्रोड्यूसर थे प्रकाश मेहरा. फिल्म का गाना 'गुटुर-गुटुर...चढ़ गया ऊपर से अटरिया पे लोटन कबूतर रे' अपने समय का चुलबुला और मजेदार होने के साथ रोमांटिक गाना भी था. गाने के बोल माया गोविंद ने लिखे थे और इसका संगीत बप्पी लाहिड़ी ने तैयार किया था. इस गाने को कुमार सानू, अलका याज्ञनिक, बप्पी लाहिड़ी और इला अरुण ने अपने मजेदार गाने के अंदाज से सजाया था. गाने के बोल में कबूतर, अटरिया, लोटन जैसे देसी शब्दों का इस्तेमाल किया गया था और रोमांस को चुलबुले अंदाज में पेश किया गया. यहां तक की गान में कबूतर की गुटुर-गुटुर आवाज को भी शामिल किया गया. देसी अंदाज, चुलबुलापन ही है कि ये गाना आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है. गाने के बोल इस तरह हैं-
अरे, चढ़ गया ऊपर रे..., हे(गुटुर-गुटुर, गुटुर-गुटम, गुटुर-गुटुर, गुटुर-गुटम)अरे, चढ़ गया ऊपर रे, अटरिया पे सोना कबुतर रे, हे
रे, पंछी दीवना चुग कर दाना, उड़ गया फर-फर रेअटरिया पे, ओह, अटरिया पे, हायअटरिया पे लोटन कबूतर रे, हाँ
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मर गया ऊपर रे गुजरिया पे लोटन कबूतर रे(गुटुर-गुटुर, गुटुर-गुटम, गुटुर-गुटुर, गुटुर-गुटम)
पंछी दीवना पाए जहाँ दाना, आए वहीं मुड़-मुड़ केअटरिया पे..., (आ-हा)अटरिया पे..., (होय)अटरिया पे लौटन कबुतर रे, हे
क्या थी फिल्म ‘दलाल' की कहानी?
पार्थो घोष के डायरेक्शन में बनी फिल्म दलाल को प्रकाश मेहरा ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती, आयशा जुल्का, राज बब्बर, शक्ति कपूर, टिन्नू आनंद और रवि बहल जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म की कहानी की बात करें तो इसकी कहानी भोला नाम के एक सीधे-साधे और अनपढ़ लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है. लेकिन उसकी जिंदगी में रूपाली के आने के बाद से उसकी जिंदगी बदल जाती है. भोला को पता लगता है कि वो जिन लड़कियों को उनसे भाइयों से मिलवाने का काम समझता था, वो असल में गलत काम था. इसके बाद फिल्म की कहानी और भोला की जिंदगी में बदलाव आता है. फिल्म में रोमांस और कॉमेडी के साथ समाज के गंभीर मुद्दे को भी दिखाया गया था.
गाने कि किया गया पसंद
उस समय इस गाने को खूब पसंद किया गया था. हालांकि फिल्म दलाल के दूसरे गाने भी काफी फेमस हुए थे. दलाल के साउंडट्रैक में 7 गाने थे जिनमें 'चोरी चोरी मैंने', 'ना उन्नीस से कम' और 'ठहरे हुए पानी में' जैसे गानों को भी पसंद किया गया.

Photo Credit: Wikipedia
लेकिन 'गुटुर-गुटुर' ने अपनी एक अलग पहचान बनाई. इस गाने के एक वीडियो अपलोड को यूट्यूब पर 20 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. बप्पी लाहिड़ी के संगीत, चार गायकों की अलग-अलग आवाजों और मिथुन-आयशा की जोड़ी ने इस गाने को 90 के दशक के यादगार फिल्मी गीतों में जगह दिलाई.
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