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24 साल पहले भाई बॉबी देओल की खातिर सनी देओल ने छोड़ दी थी ये फिल्म, बाद में उसी रोल ने अजय देवगन को दिलाया नेशनल अवॉर्ड

सनी देओल ने एक बार अपने भाई बॉबी देओल के लिए ऐसी फिल्म छोड़ दी थी, जो बाद में हिंदी सिनेमा की क्लासिक बन गई. फिल्म में अजय देवगन ने लीड रोल निभाया और इसके लिए उन्हें दूसरा नेशनल अवॉर्ड भी मिला.

24 साल पहले भाई बॉबी देओल की खातिर सनी देओल ने छोड़ दी थी ये फिल्म, बाद में उसी रोल ने अजय देवगन को दिलाया नेशनल अवॉर्ड
जब भाई बॉबी देओल के लिए सनी देओल ने छोड़ दी थी ब्लॉकबस्टर फिल्म
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देशभक्ति पर बनी फिल्मों की बात हो और देओल परिवार का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था, जब सनी देओल ने अपने छोटे भाई बॉबी देओल के लिए एक ऐसी फिल्म छोड़ दी, जिसे बाद में हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में गिना गया. दिलचस्प बात ये है कि जिस फिल्म को सनी ने छोड़ा, उसी में लीड रोल निभाने वाले एक्टर को नेशनल अवॉर्ड मिला. वहीं, सनी ने भाई के साथ दूसरी फिल्म चुनी, लेकिन दोनों फिल्मों की किस्मत बॉक्स ऑफिस पर लगभग एक जैसी रही.

सनी ने चुना भाई बॉबी का साथ

साल 2002 में निर्देशक राजकुमार संतोषी 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' बना रहे थे. इस फिल्म में भगत सिंह का किरदार अजय देवगन निभा रहे थे. जबकि चंद्रशेखर आजाद के रोल के लिए सनी देओल को चुना गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सनी चाहते थे कि भगत सिंह का किरदार अजय देवगन की जगह उनके छोटे भाई बॉबी देओल निभाएं. बताया जाता है कि सनी ने इस बारे में राजकुमार संतोषी से बात भी की. लेकिन संतोषी अपने फैसले पर कायम रहे और उन्होंने अजय देवगन को ही लीड रोल में रखा. इसके बाद सनी ने फिल्म छोड़ने का फैसला कर लिया. यही फैसला आगे चलकर उनके और राजकुमार संतोषी के रिश्तों में खटास की वजह भी बना. इसके बाद सनी देओल ने डायरेक्टर गुड्डू धनोआ की फिल्म '23 मार्च 1931: शहीद' साइन कर ली. इस फिल्म में बॉबी देओल ने भगत सिंह का किरदार निभाया, जबकि सनी देओल चंद्रशेखर आजाद बने. दिलचस्प बात ये रही कि दोनों फिल्में 7 जून 2002 को एक ही दिन सिनेमाघरों में रिलीज हुई थीं.

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अजय देवगन को मिला दूसरा नेशनल अवॉर्ड

'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' एक बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म थी. फिल्म में भगत सिंह के बचपन से लेकर 23 मार्च 1931 को फांसी दिए जाने तक की कहानी दिखाई गई. ए. आर. रहमान का संगीत, खासकर 'मेरा रंग दे बसंती' और 'सरफरोशी की तमन्ना' गाने काफी पसंद किए गए. करीब 20 से 25 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म को क्रिटिक्स ने खूब पसंद किया. निर्देशन, कहानी और अजय देवगन की दमदार एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई. हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर फिल्म उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं कर सकी. इसके बावजूद फिल्म ने दो नेशनल फिल्म अवॉर्ड अपने नाम किए, जिनमें बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड अजय देवगन को मिला. ये उनके करियर का दूसरा नेशनल अवॉर्ड था. दिलचस्प बात ये है कि उसी दिन रिलीज हुई '23 मार्च 1931: शहीद' भी टिकट खिड़की पर कोई बड़ा कमाल नहीं दिखा सकी.

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