दूरदर्शन की रामायण को आजतक भूला नहीं पाए हैं. जनवरी 1987 से लेकर जुलाई 1988 तक इस शो की चर्चा रही, जिसे देखने के लिए सड़के खाली हो जाती थीं. लेकिन हम आपको उस फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे देखने के लिए अप्रैल 1988 में सिनेमाघरों में ना सिर्फ लाइनें लगीं. बल्कि इसके गानों को दर्शकों का इतना प्यार मिला कि यह साल की सबसे ज्यादा बिकने वाली एल्बम बन गई. खास बात यह है कि इस एल्बम में 5 गाने थे, जिसे अलका याग्निक और उदित नारायण ने गाया. वहीं यहीं से उनके करियर को एक नई उड़ान दी और किस्मत पलट कर रख दी.
1988 में आई फिल्म का दूरदर्शन की रामायण का जलवा
हम बात कर रहे हैं 29 अप्रैल 1988 में रिलीज हुई फिल्म कयामत से कयामत तक की, जिसमें आमिर खान और जूही चावला लीड रोल में नजर आए थे. यह रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म थी, जो कि मंसूर खान का डायरेक्टोरियल डेब्यू था.
ट्रैजिक लव स्टोरी को फैंस ने किया पसंद
कयामत से कयामत तक की कहानी रोमियो जूलियट जैसी स्टोरी दिखाती है, जिसमें दो परिवारों के बीच पुरानी दुश्मनी है. धनराज सिंह ने सालों पहले अपने परिवार की बेइज्जती का बदला लेने के लिए दुश्मन परिवार के लड़के को मार दिया था. सालों बाद धनराज का बेटा राज (आमिर खान) और दुश्मन परिवार की बेटी रश्मि (जूही चावला) को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है. परिवार के खिलाफ जाकर राज और रश्मि भाग जाते हैं और वीरान किले में शरण लेते हैं. लेकिन परिवार वाले उन्हें ढूंढ लेते हैं. अंत में रश्मि की गोली लगने से मौत हो जाती है और राज खुदकुशी कर लेता है.
उदित नारायण और अलका याग्निक के 5 सुपरहिट गाने
कयामत से कयामत तक के गाने को आनंद मिलिंद ने कंपोज किया और मजरूह सुल्तानपुरी ने गानों के बोल लिखे. जहां उदित नारायण आमिर खान की आवाज बने तो अलका याग्निक ने जूही चावला की आवाज में गाने गाए.
कयामत से कयामत के 5 गाने
पहला गाना पापा कहते हैं (उदित नारायण)
दूसरा गाना ए मेरे हमसफर (उदित नारायण और अलका याग्निक)
तीसरा गाना अकेले हैं तो क्या गम है (उदित नारायण और अलका याग्निक)
चौथा गाना गजब का है दिन (उदित नारायण और अलका याग्निक)
पांचवा गाना काहे सताए (अलका याग्निक)
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