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600 साल पुराने दोहे पर बना हॉरर फिल्म का गाना, इमरान हाशमी-कंगना रनौत ने 17 साल पहले बताया जिंदगी का फलसफा, आज भी एवरग्रीन

लगभग 600 साल पहले कुछ दोहों की रचना हुई. इनमें ऐसी बातें कही गईं जो छह सदियां गुजर जाने के बाद भी प्रासंगिक रहीं. तभी तो 17 साल पहले आई फिल्म में इन पर गाना बना और सुपरहिट भी हुआ. कंगना रनौत और इमरान हाशमी इसमें नजर आए.

600 साल पुराने दोहे पर बना हॉरर फिल्म का गाना, इमरान हाशमी-कंगना रनौत ने 17 साल पहले बताया जिंदगी का फलसफा, आज भी एवरग्रीन
हॉरर फिल्म में 600 साल पुराने दोहे पर बना गाना, जो आज भी है बेजोड़
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नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा के गानों के तो कहने ही क्या. बॉलीवुड के गाने सिर्फ एंटरटेन नहीं करते हैं बल्कि जिंदगी के सबक भी सिखा जाते हैं. एक ऐसा ही गाना 17 साल पहले एक फिल्म में आया था. बेशक फिल्म हॉरर थी. लेकिन ये गाना फिल्म में बिल्कुल परफेक्ट बैठता था. इस फिल्म में इमरान हाशमी और कंगना रनौत लीड रोल में थे. ये गाना उनके साथ फिल्माया गया था. इस गाने में जिस दोहे का इस्तेमाल किया गया वो लगभग 600 साल पुराने थे. ये दोहे थे संत कबीर के. इन शब्दों को इस शानदार तरीके से पिरोया गया था कि ये गाना आज भी प्रासंगिक है और दिल को छू जाता है. 

कबीर के विचारों को गाने में उतारा

साल 2008 में आई फिल्म 'राज: द मिस्ट्री कंटीन्यूस' फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन प्रदर्शन किया था. इसके साथ ही फिल्म का गाना 'बंदा रे' भी बेहद पसंद किया गया था. इस गाने की खासियत थी इसके बोल. इस गाने की शुरुआत कबीर के उस विचार से होती है जिसमें इंसान ईश्वर को बाहर खोजने के बजाय अपने भीतर तलाशने की बात करता है. गीत में मंदिर, मस्जिद, काबा और कैलाश जैसे धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए बताया गया है कि जिसे इंसान बाहर खोज रहा है, वह उसके अपने भीतर मौजूद हो सकता है. गाने के बोल कुछ इस तरह हैं-

मोको कहां तू ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में.
ना मैं मंदिर ना मैं मस्जिद, ना काबे कैलास में.
ना तो कोने क्रिया कर्म में, नहिं जोग बैराग में.
खोजी होय तो तुरत मिलिहौं, पल भर की तलाश में.
कहैं कबीरा सुनो भाई साधो, सब स्वांसों की स्वांस में.

गाने को रिलीज हुए करीब 17 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी ये अपनी आध्यात्मिक फील के लिए याद किया जाता है. इस गाने को कृष्णा बेउरा ने अपनी आवाज से सजाया था. गाने का संगीत गौरव दासगुप्ता ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल सईद कादरी ने लिखे. खास बात ये है कि गाने की कई लाइनें संत कबीर की रचनाओं और उनके आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित हैं.

इमरान-कंगना की कहानी से जुड़ा था गाना

बता दें कि इस फिल्म की कहानी के साथ इसके गानों को भी लोगों ने बेहद पसंद किया था. इस फिल्म में 8 गाने थे और सभी के सभी हिट साबित हुए. इस फिल्म के गानों का संगीत गौरोव दासगुप्ता के साथ राजू सिंह, शारिब-तोशी और प्रणय एम. रिजिया ने भी तैयार किया था. इसके अलावा फिल्म के दूसरे गाने जैसे 'सोनियो', 'ओ जाना', 'कैसा ये राज है', 'माही' और 'बंदा रे' जैसे गाने शामिल थे. 'बंदा रे' ने हॉरर फिल्म के बीच एक अलग भक्तिमय रंग जोड़ा और यही वजह है कि फिल्म के बाकी गानों से इसकी पहचान काफी अलग बनी. 

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18 करोड़ के बजट में बनी, 38 करोड़ से ज्यादा कमाए

23 जनवरी 2009 को फिल्म 'राज: द मिस्ट्री कंटीन्यूज' रिलीज हुई थी. विकिपीडिया पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक फिल्म का बजट करीब 18 करोड़ रुपये था. जिसने वर्ल्डवाइड करीब 38.09 करोड़ रुपये की कमाई की. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई.

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